ओडिशा स्थित पुरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन की ओर से निर्धारित तिथियों में रथ यात्रा और स्नान यात्रा न आयोजित करने को लेकर सख्त नाराजगी जाहिर की है. मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस्काॅन मनमाने तरीके से रथ यात्रा और स्नान यात्रा आयोजित करता है. सदियों पुरानी परंपरा का पालन नहीं करना श्रद्धालुओं की भावनाओं (rath yatra controversy) को आहता करना है, जो किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने कहा कि इसकी जानकारी पीएम मोदी को भी दी गई है. अगर जरूत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा खड़खड़ाया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. गजपति महाराजा दिब्य सिंहदेव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई गई.
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rath yatra controversy – जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस्काॅन द्वारा रथ यात्रा और स्नान यात्रा को निर्धारित धार्मिक तिथियों के अनुरूप नहीं आयोजित किया जाता है. सिंहदेव ने कहा कि ऐसी प्रथाओं से भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं.
उन्होंने कहा कि हमने पीएम को अवगत कराया है कि कैसे दुनिया भर में निर्धारित कैलेंडर से हटकर रथ यात्राएं आयोजित करके सदियों पुरानी परंपराओं की अवहेलना की जा रही है. मंदिर प्रशासन ने कहा कि अगर मामला नहीं सलझा तो हम कोर्ट भी जा सकते हैं. कानूनी कार्रवाई करना हमारा अंतिम विकल्प हो सकता है.
इस्काॅन पर लगाए आरोप
सिंहदेव के अनुसार इस्काॅन ने अक्टूबर 2025 में यह आश्वासन दिया था कि वह वैश्विक स्तर पर निर्धारित कैलेंडर से हटकर स्नान यात्रा और भारत में रथ यात्रा आयोजित करने से परहेज करेगा, लेकिन उसने इसका पालन नहीं किया. देव और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में दावा किया गया कि इस्काॅन ने शास्त्रों के नियमों से हटकर 79 स्थानों पर निर्धारित कैलेंडर से हटकर रथ यात्राएं और 10 स्नान यात्राएं आयोजित कीं.


