रांची : राजधानीवासियों के लिए रांची अब “रमणीक रांची” कम और “आवारा कुत्तों” के आतंक के साये में जीने वालों की राजधानी ज्यादा बन गयी है. अगर वर्ष 2024 और 2025 के कुल 24 महीनों के आंकड़े काफी भयावह है. इतने समय में डॉग बाइक के शिकार होकर सदर अस्पताल के रेबीज क्लीनिक पहुंचने वाले लोगों की (Dog Bite Crisis) संख्या बढ़ती ही रही है. इससे यह अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि कैसे हर महीने औसतन 18 सौ से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार होकर एंटी रेबीज वैक्सीन लेने सदर अस्पताल पहुंचते हैं.

ईटीवी भारत रांची संवाददाता ने अपनी पड़ताल में पाया कि सदर अस्पताल के अन्य बीमारियों के इलाज के लिए चलने वाले ओपीडी में मरीजों की जितनी भीड़ नहीं होती, उससे कहीं ज्यादा भीड़ हर दिन डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं, जो रेबीज से बचाव के लिए वैक्सीन लेने पहुंच रहे हैं. हैरत की बात यह है कि लगभग सभी उम्र के लोग डॉग बाइट का शिकार होकर सदर अस्पताल पहुंचते हैं. एक और ट्रेंड जो देखने को मिला वह यह है कि कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के रांची नगर निगम की ओर से कई कदम उठाने के बाद भी वर्ष 2024 की अपेक्षा 2025 में डॉग बाइट के शिकार लोगों की संख्या में करीब पांच हजार (4968) की बढ़ोतरी हुई है.

 Dog Bite Crisis – रांची सदर अस्पताल के रेबीज क्लिनिक से मिले आंकड़ें के अनुसार जनवरी 2026 के 20 दिनों में 1600 से ज्यादा लोग कुत्ता काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लेने के लिए अस्पताल पहुंच चुके हैं. जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 तक के 24 महीनों में अगर कुल मिलाकर डॉग बाइट के शिकार लोगों की संख्या की बात करें तो 24 महीनों में कुल मिलाकर 44176 लोग सिर्फ राजधानी रांची क्षेत्र में डॉग बाइट के शिकार हुए हैं. सदर अस्पताल में रेबीज क्लिनिक की दीदी इंदुबाला कहती हैं कि हर दिन डॉगबाइट के नया और पुराना 500 के करीब लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लेने पहुँचते हैं.

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