धनबादः आम तौर पर IIT-ISM में पढ़ने वाले छात्रों को लोग सिर्फ इंजीनियरिंग, लैब और किताबों तक सीमित समझते हैं. लेकिन यहां के छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि उनकी प्रतिभा केवल (cinematic blast of students) तकनीक तक ही सीमित नहीं है. पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मकता और सामाजिक सरोकार को सामने लाते हुए छात्रों ने एक फिल्म बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है.

फिल्म में सामाजिक सोच की झलक

 फिल्म की कहानी भी धनबाद की एक बस्ती से जुड़ी है. कहानी की शुरुआत आईआईटी-आईएसएम के कैंटीन स्टाफ द्वारा कुरकुरे चोरी की एक छोटी सी घटना से होती है. यह स्टाफ धनबाद की बगुला (cinematic blast of students) बस्ती धनबाद का रहने वाला होता है. उसकी दुखभरी कहानी सुनकर आईएसएम में पढ़ाई कर रहे दो छात्र-छात्राएं- मौलश्री और शिवांग उसकी मदद करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेते हैं.

माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे उनकी मदद करें

हालांकि इस मामले में दखल देने के कारण संस्थान का प्रबंधन उन्हें दंडित करता है और सजा के तौर पर शहर के बीचों-बीच स्थित बगुला बस्ती के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की जिम्मेदारी दे देता है. यह काम दोनों छात्रों के लिए आसान नहीं होता, क्योंकि बस्ती के कई माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय घर चलाने में हाथ बंटाने के लिए काम पर लगाना चाहते हैं. दो वक्त की रोटी जुटाना ही उनके लिए बड़ी चुनौती होती है.

पढ़ाई का महत्व फैलाने का प्रयास

इन्ही कठिन परिस्थितियों के बीच दोनों छात्र, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की कोशिश करते हैं और धीरे-धीरे बस्ती के लोगों में पढ़ाई के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने का प्रयास करते हैं. फिल्म में मुख्य भूमिका आईआईटी-आईएसएम के छात्र मौलश्री और शिवांग ने निभाई है, जबकि बाल कलाकार के रूप में बगुला बस्ती की निर्मला हजारा नजर आती हैं. इसके अलावा धनबाद के बिपिन कुमार और काका जी भी फिल्म का हिस्सा हैं.

IIT-ISM के कई छात्र फिल्म का हिस्सा

फिल्म के निर्माण में भी धनबाद के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. फिल्म के एसोसिएट डायरेक्टर अनिकेत मिश्रा धनबाद से हैं, जबकि प्रोड्यूसर राम प्रवेश कुमार ने स्थानीय स्तर पर निर्माण में अहम जिम्मेदारी निभाई. वहीं जूनियर आर्टिस्ट दीपक चौहान और IIT-ISM के कई छात्र भी फिल्म का हिस्सा रहे हैं.

 

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