छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बार फिर जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक ओर जहां हाल ही में आंबेडकर अस्पताल में सीजीपीएससी भर्ती घोटाले मामले में जेल में बंद टामन सिंह सोनवानी को कथित तौर पर वीआईपी सुविधाएं दिए जाने का वीडियो सामने आया था, वहीं अब रायपुर सेंट्रल जेल के भीतर से कैदियों द्वारा पैसों की अवैध वसूली, प्रताड़ना और मारपीट के गंभीर आरोप लगाने वाले कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वायरल वीडियो में कैदियों ने जेल के कुछ प्रहरियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनसे जबरन पैसे मांगे जाते हैं, पैसे न देने पर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती है और उनके वकीलों तथा परिजनों से मुलाकात करने में भी जानबूझकर बाधाएं पैदा की जाती हैं।
💸 शरीर पर चोट के निशान और ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट आए सामने, मेडिकल वार्ड में शिफ्ट करने का खेल
सामने आए एक वीडियो में एक कैदी अपने शरीर पर लगी चोटों के निशान दिखाते हुए जेल प्रहरियों पर मारपीट का साफ दावा कर रहा है। इसके साथ ही इस मामले से जुड़े कुछ ऑनलाइन भुगतान (डिजिटल पेमेंट) के स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। कैदी का आरोप है कि जेल के भीतर कम भीड़भाड़ वाले अच्छे बैरक या मेडिकल वार्ड में शिफ्ट करने के एवज में 15 से 20 हजार रुपए की अवैध मांग की जाती है। इसके अलावा, वकीलों और परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति देने के लिए भी 5 से 7 हजार रुपए तक वसूले जाने का आरोप लगाया गया है। कैदी के मुताबिक, इनमें से कई भुगतानों को ऑनलाइन माध्यम से ही ट्रांसफर करवाया गया है।
🤕 दूसरे कैदी ने भी लगाया मारपीट और हाथ-पैर में फ्रैक्चर का आरोप, चार प्रहरियों के लिए गए नाम
एक अन्य वीडियो में ‘स्टुपेंड-3’ से होने का दावा करने वाले एक और कैदी ने भी जेल प्रशासन और प्रहरियों पर वसूली व मारपीट की खुलकर पोल खोली है। उसका कहना है कि जेल के भीतर वीआईपी कैदियों को मलाईदार और बेहतर सुविधाएं दी जाती हैं, जबकि सामान्य कैदियों से पैसों की मांग की जाती है। इस कैदी ने अपने हाथ और पैरों पर गंभीर चोट के निशान दिखाते हुए दावा किया कि पैसे न देने पर उसके साथ इतनी बुरी तरह मारपीट की गई कि उसके हाथ-पैर में फ्रैक्चर तक हो गया है। पहले वीडियो में कैदियों द्वारा मन्नत पुरैना, टेकराम, मिथिलेश और राजू साहू नामक चार प्रहरियों के नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि इनमें से कुछ प्रहरी पिछले करीब 20 वर्षों से एक ही स्थान पर कैसे जमे हुए हैं।
🏛️ जेल अधीक्षक ने वीडियो की प्रामाणिकता और पुष्टि करने से किया साफ इनकार
कैदियों द्वारा वायरल किए जा रहे इन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वे अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर गंभीर चोट के निशान दिखाते हुए समय पर उचित चिकित्सा और न्याय न मिलने की गुहार लगा रहे हैं। दूसरी ओर, इस पूरे संवेदनशील मामले पर जब जेल प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो जेल अधीक्षक ने इन वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और सच्चाई की पुष्टि करने से पूरी तरह इनकार कर दिया। जेल अधीक्षक का कहना है कि वर्तमान में यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि वायरल हो रहा यह वीडियो वास्तव में इसी जेल का है या नहीं। जेल के अंदर हजारों की संख्या में कैदी बंद हैं और वे कब व कहां से इस तरह के वीडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं, इस बारे में तुरंत कुछ भी कहना मुश्किल है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जेल परिसर में 200 से अधिक स्टाफ तैनात है, इसलिए फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं की जा सकती।


