छतरपुर (मध्य प्रदेश): लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जल्द ही मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिले के दौरे पर आ सकते हैं। राहुल गांधी ने यह आश्वासन केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं और विस्थापित किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे संसद से लेकर सड़क तक परियोजना प्रभावितों के हक और उचित मुआवजे की मांग को प्रमुखता से उठाएंगे।
🤝 दिल्ली में राहुल गांधी से मिला 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, बयां किया दर्द
प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात और चर्चा के प्रमुख बिंदु:
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दिल्ली में बैठक: केन-बेतवा लिंक परियोजना विरोधी आंदोलन की अगुवाई करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और पार्षद दिव्या अहिरवार के नेतृत्व में छतरपुर व पन्ना के किसानों का 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा था।
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विस्तृत चर्चा: प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर विस्थापित परिवारों की जमीनी समस्याएं, पुनर्वास के मुद्दे और विस्थापन से जुड़ी चिंताओं को साझा किया।
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छतरपुर आने का भरोसा: लगभग एक घंटे तक चली बैठक के बाद राहुल गांधी ने प्रभावित किसानों व महिलाओं की समस्याओं को ध्यान से सुना और बहुत जल्द छतरपुर आकर विस्थापितों के बीच पहुंचने का वादा किया।
💰 मुआवजा ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹12.5 लाख हुआ, फिर भी अपात्रों को लाभ देने का आरोप
परियोजना के मुआवजे और विवाद की पृष्ठभूमि:
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सूखे बुंदेलखंड को हरा-भरा करने के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ किया गया था।
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आंदोलन और मांगें: परियोजना की शुरुआत के साथ ही विस्थापितों ने उचित मुआवजे के लिए आमरण अनशन, चिता आंदोलन और जल सत्याग्रह जैसे कड़े कदम उठाए थे।
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कैबिनेट का फैसला: इसके बाद डॉ. मोहन यादव सरकार ने विस्थापितों के लिए मुआवजा राशि ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹12.5 लाख करने और छूटे हुए लोगों को शामिल करने के लिए पुन: सर्वे कराने का निर्णय लिया, जिसके बाद आंदोलन स्थगित हुआ था।
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नए आरोप: सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आरोप है कि वर्तमान में अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है जबकि वास्तविक पात्र विस्थापित अब भी अपने हक से वंचित हैं।
📊 क्या है केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट? जानिए मुख्य आंकड़े
देश की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना की रूपरेखा:
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परियोजना लागत: देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के तहत करीब ₹44,000 करोड़ की अनुमानित लागत से ढोढन बांध और 221 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण प्रस्तावित है।
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सिंचाई और पेयजल लाभ: इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य बुंदेलखंड के 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा, 62 से 65 लाख लोगों को शुद्ध पेयजल और 103 मेगावाट जलविद्युत उपलब्ध कराना है।
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विस्थापन का दायरा: परियोजना के दायरे में 22 गांव आ रहे हैं, जिनमें से 10 गांव पूरी तरह डूब क्षेत्र में समा जाएंगे और लगभग 7,000 परिवारों का पुनर्वास होना है।


