केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को गांधीनगर में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा आयोजित ‘अर्थ समिट 2025’ का उद्घाटन किया. सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दुनिया में सतत विकास का नया आदर्श स्थापित किया है. उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, पशुपालन और सहकारिता (earth summit 2025) को भारत की आर्थिक रीढ़ बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में देश का विकास मॉडल इन्हीं आधारों पर खड़ा होगा.

गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह दूसरी शिखर-वार्ता, देशभर में आयोजित की जा रही तीन अर्थ-सम्मिटों की श्रेणी में एक महत्वपूर्ण कड़ी है. इन शिखर-वार्ताओं का उद्देश्य केवल देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना ही नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर नए सिरे से विचार कर परिणाम-उन्मुख समाधान निकालना भी है.

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अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी जी ने कहा था कि यदि भारत को आगे बढ़ना है, तो उसके विकास की परिकल्पना गांवों को केंद्र में रखे बिना संभव नहीं है. लेकिन, आज़ादी के कुछ वर्षों बाद ही हम इस मंत्र को भूल बैठे. कृषि, पशुपालन और सहकारिता — ग्रामीण विकास के तीन प्रमुख स्तंभ — लंबे समय तक उपेक्षित रहे हैं.

earth summit 2025 – उन्होंने कहा कि समग्र दृष्टिकोण के साथ हमने तय किया है कि आने वाले सालों में देश की प्रत्येक पंचायत में एक सहकारी संस्था स्थापित की जाएगी. सहकारिता के माध्यम से 50 करोड़ से अधिक सक्रिय सदस्य बनाए जाएंगे तथा सहकारिता का GDP योगदान वर्तमान की तुलना में बढ़ाया जाएगा. जब यह लक्ष्य पूरे होंगे, तब कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं छूटेगा. चाहे वह पशुपालन करने वाली ग्रामीण महिला हो, या छोटे किसान हर कोई आगे रहेगा.

 

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