प्रेग्नेंसी में बच्चे की ग्रोथ और सेहत के बारे में जरूरी बातें जानी जा सकें, इसके लिए इन 9 महीनों के अलग-अलग फेज में अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं. अल्ट्रासाउंड स्कैन एक ऐसी तकनीक है जिसमें ध्वनि तरंगों के द्वारा शरीर के अंदर की तस्वीरें ली जाती हैं, तो वहीं MRI में शरीर के किसी भी हिस्से की 3D या स्पष्ट क्रॉस-सेक्शनल तस्वीर ली जा सकती है, लेकिन (Pregnancy Scan Guide) इसके बावजूद आमतौर पर इसका इस्तेमाल प्रेग्नेंसी के दौरान नहीं किया जाता है. आइए जान लेते हैं इसकी क्या वजह है.
Pregnancy Scan Guide – MRI को स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए जांच की बेहतर तकनीक माना गया है, जिससे गहराई से बीमारी का पता लगाया जा सकता है. ऐसे में प्रेग्नेंसी के दौरान जांच के लिए इसका उपयोग क्यों नहीं किया जाता है? इसके पीछे का कारण मुख्यतौर पर इन दोनों जांचों के प्रोसेस में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकें हैं.
कैलाश हॉस्पिटल, देहरादून की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर दिव्या गोस्वामी कहती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे की ग्रोथ और उसकी सेहत की जानकारी के लिए अल्ट्रासाउंड की सलाह इसलिए दी जाती है, क्योंकि इसमें ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रेडिएशन जैसा कोई खतरा नहीं होता है.
अब बात कर लेते हैं कि आखिर प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर MRI कराने की सलाह क्यों नहीं देते हैं. दरअसल, यह जांच भले ही पूरी तरह से सुरक्षित होती है और इसमें हानिकारक विकिरण नहीं होती है, लेकिन इसमें बहुत तेज चुंबकीय क्षेत्र यानी मैग्नेटिक फील्ड होता है. इसी के साथ रेडियो तरंगों का इस्तेमाल भी किया जाता है. इससे शरीर के टेम्परेचर (तापमान) में हल्की सी वृद्धि हो सकती है, जिसके प्रति गर्भ में पल रहा भ्रूण संवेदनशील हो सकता है.


