कोरबा। देश और दुनिया के सामने कचरा प्रबंधन आज एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, जिससे न केवल हवा जहरीली हो रही है बल्कि बीमारियां भी बढ़ रही हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कोरबा जिले में एक बड़ी पहल शुरू की गई है। इसके तहत अब शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक के कचरे से पक्की सड़कों का निर्माण किया जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत इस अनूठी तकनीक के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, और 15 अक्टूबर के बाद इस दिशा में निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी।
💰 ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का कॉन्सेप्ट: स्वसहायता समूहों को मिलेगा रोजगार, कलेक्टर ने दी जानकारी
कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि इस तकनीक के इस्तेमाल से सड़कें न केवल अधिक मजबूत और टिकाऊ बनेंगी, बल्कि पर्यावरण में फैल रहे प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटान में भी बड़ी मदद मिलेगी। ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा के तहत PMGSY द्वारा प्लास्टिक कचरे की खरीदी की जाएगी, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्वसहायता समूहों और स्थानीय नागरिकों के लिए आय के नए साधन विकसित होंगे। इस प्रक्रिया में पॉलीथीन बैग और पैकेजिंग रैपर जैसे प्लास्टिक कचरे को बारीक टुकड़ों में रीसायकल कर डामर के साथ मिलाया जाता है।
🛡️ प्लास्टिक युक्त सड़कों के फायदे: पानी नहीं सोखेगा डामर, मानसून में भी नहीं बनेंगे गड्ढे
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म पत्थरों और गिट्टी में तय मात्रा में प्लास्टिक का चूरा मिलाने से डामर की पानी सोखने की क्षमता लगभग समाप्त हो जाती है, जिससे बारिश के दिनों में सड़कों पर गड्ढे नहीं बनते और सड़क की उम्र दोगुनी हो जाती है।
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सड़कों पर दरारें नहीं आतीं और बाइंडिंग मजबूत होती है।
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वाहन चालकों के लिए टायर की ग्रिप बेहतर रहती है और गाड़ियां स्किट नहीं करतीं।
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डामर की बचत होने से रखरखाव का खर्च कम आता है और पर्यावरण को प्लास्टिक से मुक्ति मिलती है।

