पलामू: जिले के नावाबाजार प्रखंड कार्यालय में प्रशासनिक और जनप्रतिनिधि के बीच का विवाद चरम पर पहुँच गया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) रेणू बाला ने प्रखंड प्रमुख के पति कुशनाथ दुबे पर मानसिक प्रताड़ना, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने पलामू डीसी और डीडीसी को पत्र लिखकर सुरक्षा की गुहार लगाई है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

📋 BDO के पत्र में लगे गंभीर आरोप

बीडीओ रेणू बाला द्वारा लिखे गए पत्र के अनुसार, प्रमुख के पति कुशनाथ दुबे दिन भर प्रखंड कार्यालय में डेरा डाले रहते हैं। उन पर निजी निर्माण कार्य के लिए सामग्री मांगने, म्यूटेशन फाइलों में दखल देने और कर्मचारियों को फोन पर धमकाने का आरोप है। बीडीओ ने यह भी आरोप लगाया कि प्रमुख खुद प्रखंड कार्यालय नहीं आतीं और सारे काम उनके पति द्वारा किए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि लगातार मानसिक दबाव के कारण उनका स्वास्थ्य (ब्लड प्रेशर और शुगर) बिगड़ रहा है और उन्हें डर है कि आपराधिक तत्वों के माध्यम से उन्हें नुकसान पहुँचाया जा सकता है।

🎙️ प्रखंड प्रमुख का पलटवार: ‘बदले की भावना से हो रही कार्रवाई’

दूसरी ओर, प्रखंड प्रमुख विद्या कुमारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे बीडीओ द्वारा उनके खिलाफ ‘बदले की भावना’ से की गई कार्रवाई बताया है। प्रमुख का कहना है कि उन्होंने पूर्व में बीडीओ की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीण विकास मंत्री और उप विकास आयुक्त से शिकायत की थी। प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रखंड कार्यालय में दलालों का जमावड़ा लगा रहता है, बैठक की कार्यवाही (Proceedings) बदली जाती है और आम जनता के साथ बीडीओ का व्यवहार अभद्र है।

🛑 प्रशासनिक पचड़े में फंसा विकास कार्य

एक तरफ अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधि के पति पर वसूली और प्रताड़ना के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि द्वारा अधिकारी पर दलाली और अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस विवाद के कारण नावाबाजार प्रखंड का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय यह है कि जब प्रशासनिक प्रमुख और निर्वाचित प्रतिनिधि ही आमने-सामने होंगे, तो क्षेत्र का विकास कार्य कैसे गति पकड़ेगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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