संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत हमेशा पाकिस्तान के साथ शांति चाहता है, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान, भारत के साथ ऐसा नहीं चाहता. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत के साथ लड़ाई (Pakistan does not want peace) छोड़कर कर आगे बढ़ने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करना चाहिए. लेकिन जब तक वो ऐसा नहीं करता तब तक हमें उसको उसी के भाषा में जवाब देना होगा
Pakistan does not want peace – भागवत ने कहा कि पाकिस्तान को ये हर बार लगना चाहिए कि यदि हम भारत के साथ संघर्ष करेंगे तो उसका परिणाम नुकसानदायक होगा. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा चाहेगा कि पड़ोसी देश शांतिपूर्वक आगे बढ़े. तरक्की करे, उसमें हम उसको मदद भी कर सकें.
भागवत ने किया 1971 के युद्ध का जिक्र
भागवत ने आगे कहा कि 1971 में पाकिस्तान ने भारत के हाथों अपनी 90,000 सैनिकों की सेना खो दी थी. अगर ऐसा बार-बार होता रहा, तो एक दिन पाकिस्तान को सबक मिल जाएगा कि सहयोग करना ही बेहतर है. उन्होंने कहा कि हमें पाकिस्तान को समझाना होगा इसलिए हमें वही भाषा बोलनी होगी जो वे समझते हैं. हमें उनकी बार-बार की कोशिशों के लिए तैयार रहना होगा.
पाकिस्तान को करारा जवाब देना होगा
उन्होंने कहा कि हमें उन्हें करारा जवाब देना होगा, उन्हें हर हाल में हराना होगा, हर बार उन्हें इतना नुकसान पहुंचाना होगा कि उन्हें पछताना पड़े. जब ऐसा ही चलता रहेगा, तो एक दिन पाकिस्तान समझ जाएगा. हम चाहते हैं कि वे इसे समझें और फिर वे हमारे एक बेहद शांतिपूर्ण पड़ोसी बन जाएं. अपनी प्रगति के साथ हम उनकी भी प्रगति करेंगे. यही हमारा शांतिपूर्ण इरादा है.


