O Romeo Review : इंतजार की घड़ियां खत्म हो गई हैं. विशाल भारद्वाज की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘ओ रोमियो’ आज थिएटर में दस्तक दे चुकी है. इस फिल्म के साथ शाहिद कपूर एक बार फिर ‘कमीने’ और ‘हैदर’ वाले डार्क अवतार में लौटे हैं, साथ में तृप्ति डिमरी की फ्रेशनेस और नाना पाटेकर का वो कड़क अंदाज भी है. लेकिन, क्या विशाल भारद्वाज ने ‘ओ रोमियो’ के साथ फिर से ‘ओमकारा’ जैसा जादू बिखेरा है? या फिर इस बार ‘रोमियो’ का तीर निशाने से चूक गया है?
विशाल भारद्वाज अपनी फिल्मों में ‘लेयर्स’ के लिए जाने जाते हैं, लेकिन ‘ओ रोमियो’ में लेयर्स इतने ज्यादा हैं कि दर्शक बेचारा प्याज की तरह छिलता रह जाता है. फिल्म की शुरुआत धीमी लेकिन असरदार होती है, लेकिन सेकंड हाफ में कहानी इतनी उलझ जाती है कि आपको समझ नहीं आता कि आप शेक्सपियर का नाटक देख रहे हैं या कोई डार्क साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म.
इसे भी पढ़ें – फरवरी में आएगा ‘धुरंधर: द रिवेंज’ का पहला गाना, जानें कब रिलीज होगा रणवीर सिंह की फिल्म का ट्रेलर
O Romeo Review – इसमें कोई शक नहीं कि शाहिद कपूर एक पावरहाउस परफॉर्मर हैं. ‘ओ रोमियो’ में उन्होंने अपनी पूरी आत्मा झोंक दी है. लेकिन कुछ सीन्स में वो इतने ज्यादा इंटेंस हो गए हैं कि लगता है वो ‘कबीर सिंह’ और ‘हैदर’ का मिक्सचर बन गए हैं.
फिल्म में तृप्ति डिमरी (जूलियट के किरदार में) बला की खूबसूरत लगी हैं और उनकी एक्टिंग भी दमदार है. विशाल भारद्वाज ने उनके टैलेंट का पूरा इस्तेमाल भी किया है. लेकिन फिल्म में शाहिद और तृप्ति से ज्यादा शाहिद और नाना पाटेकर या फिर शाहिद और दिशा पटानी की केमिस्ट्री नजर आती हैं.


