नोएडा: दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कर्मचारियों को 5100 रुपए का बोनस मिलने का दावा करने वाला एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा था, जो अब पूरी तरह फर्जी साबित हुआ है। इस वायरल संदेश में यह दावा किया गया था कि देश के उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने एक आदेश जारी कर सभी सरकारी और निजी कंपनियों को यह निर्देश दिया है कि वे आगामी 5 नवंबर तक कर्मचारियों के बैंक खातों में उनके वेतन के साथ 5100 रुपए का दिवाली बोनस अनिवार्य रूप से ट्रांसफर करें। इस भ्रामक और मनगढ़ंत दावे पर संज्ञान लेते हुए नोएडा पुलिस ने इसे पूरी तरह तथ्यहीन करार दिया है। पुलिस ने इस प्रकार की फर्जी सूचना को तैयार कर सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने और भ्रम पैदा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर मनगढ़ंत दावों के साथ फैलाया गया संदेश, कर्मचारियों में जगी थी बोनस मिलने की आस
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस संदेश में बड़े ही शातिर तरीके से यह बात फैलाई गई थी कि देश की सभी सरकारी और प्राइवेट कंपनियों के लिए अपने कर्मचारियों को सैलरी के अलावा 5100 रुपए का अतिरिक्त बोनस देना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। इतना ही नहीं, मैसेज में यह चेतावनी भी दी गई थी कि यदि कोई कंपनी इस आदेश का पालन नहीं करती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस तरह के लुभावने संदेश के सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर होने के कारण आम कर्मचारियों और नौकरीपेशा लोगों के मन में दिवाली बोनस मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। हालांकि, जब इस मामले की जमीनी स्तर पर पड़ताल की गई, तो यह बात सामने आई कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऐसा कोई भी आदेश कभी जारी नहीं किया गया है।
नोएडा कमिश्नरेट पुलिस की कड़ी कार्रवाई, भ्रामक सूचना फैलाने वाले आरोपी पर कसा शिकंजा
नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि 5100 रुपए का बोनस दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के नाम पर जो आदेश इंटरनेट पर परोसा जा रहा है, उसका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की झूठी और भ्रामक सूचना को समाज में फैलाकर अव्यवस्था या भ्रम की स्थिति पैदा करने वाले शख्स को चिह्नित कर लिया गया है और उसके विरुद्ध संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की तकनीकी टीम अन्य पहलुओं पर भी गहनता से जांच कर रही है।
पुलिस की आम जनता से अपील: बिना पुष्टि के सोशल मीडिया के किसी भी वायरल मैसेज पर आंख मूंदकर न करें भरोसा
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने प्रदेश और देश की आम जनता से विशेष तौर पर अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड होकर आने वाले किसी भी संदेश पर बिना सोचे-समझे या बिना जांच-पड़ताल किए भरोसा बिल्कुल न करें। खासकर वेतन, छुट्टियों, बोनस या देश की किसी बड़ी अदालत (न्यायालय) के फैसलों से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं को सोशल मीडिया पर आगे साझा करने से पहले उसकी सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए। चूंकि दीपावली के इस खास मौके पर हर कर्मचारी को अपनी कंपनी से बोनस मिलने की उम्मीद रहती है, इसलिए शातिर तत्व इस प्रकार की भावनाओं का फायदा उठाकर ऐसे फर्जी और भ्रामक संदेश तेजी से वायरल कर देते हैं।
भ्रामक खबरों और अफवाहों से बचने की सलाह, जिम्मेदारी के साथ करें सोशल मीडिया का उपयोग
पुलिस विभाग ने नागरिकों को यह बहुमूल्य सलाह दी है कि यदि उन्हें इंटरनेट या किसी मैसेजिंग ऐप पर कोई ऐसा संदेश मिलता है जो किसी कथित सरकारी आदेश या अदालती फैसले का दावा करता हो, तो वे तुरंत संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या किसी अन्य विश्वसनीय न्यूज स्रोत के माध्यम से उसकी सत्यता जांच लें। बिना जाँचे-परखे ऐसी पोस्टों को आगे फॉरवर्ड करने से समाज में न केवल गलत और भ्रामक जानकारी फैलती है, बल्कि आम लोगों के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न होती है। पुलिस ने सभी से जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाते हुए सोशल मीडिया का उपयोग करने और फेक न्यूज को फैलने से रोकने में अपना पूरा सहयोग देने का आग्रह किया है।


