लखनऊ/गोरखपुर : मजबूत इरादे हों तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी आपके सपनों की उड़ान नहीं रोक सकतीं। लखनऊ में घर-घर जाकर घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली महिला की बेटी और गोरखपुर के एक ऑटो रिक्शा चालक के बेटे ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में शानदार सफलता हासिल कर इस बात (NEET UG Success Story) को सच साबित कर दिया है। विपरीत परिस्थितियों से लड़कर मंजिल तक पहुंचने वाले इन दोनों होनहार छात्रों की सफलता अब हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।
पिता के निधन के दर्द ने नीलू को बनाया डॉक्टर
लखनऊ के गोमती नगर इलाके के एक गांव में रहने वाली नीलू ने कक्षा आठ में ही इलाज के अभाव में अपने पिता को खो दिया था। परिवार आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं था कि उनका सही ढंग से इलाज करा सके। इसी दर्दनाक घटना ने नीलू के जीवन की दिशा बदल दी। नीलू बताती हैं, “मेरे पिता की मौत इसलिए हुई क्योंकि हम इलाज का खर्च नहीं उठा सके थे। उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि मैं डॉक्टर बनूंगी, ताकि किसी और परिवार को गरीबी की वजह से अपना प्रियजन न खोना पड़े।”
ऑटो चालक के बेटे विशाल ने चौथे प्रयास में पाई मंजिल
दूसरी तरफ, गोरखपुर (Gorakhpur) के ऑटो रिक्शा चालक संतोष तिवारी के बेटे विशाल तिवारी ने भी घोर आर्थिक संघर्षों के बावजूद नीट परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है। अपने चौथे प्रयास में उसने 720 में से 605 अंक प्राप्त किए हैं। विशाल ने वर्ष 2022 में 12वीं पास करने के बाद बिना किसी कोचिंग के मेडिकल प्रवेश परीक्षा की (NEET UG Success Story) तैयारी शुरू कर दी थी, क्योंकि उनका परिवार महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ था।
शादी और जिम्मेदारियों के बीच नहीं छोड़ा डॉक्टर बनने का सपना
संघर्ष और तैयारी के इस दौर में विशाल की शादी हो गई और बाद में वह एक बेटे के पिता भी बन गए। इतनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने डॉक्टर बनने का अपना सपना नहीं छोड़ा। आखिरकार उनके पिता ने कर्ज लेकर उन्हें कोचिंग में दाखिला दिलाया। विशाल ने कोचिंग के साथ-साथ देर रात तक लाइब्रेरी में पढ़ाई की और खुद का खर्च निकालने के लिए बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया। विशाल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और पत्नी को देते हुए भावुक होकर कहा, “डॉक्टर बनने के बाद मैं सबसे पहले अपने पिता के लिए एक कार खरीदना चाहता हूं।”
