महाराष्ट्र के नाशिक में स्थित टीसीएस कंपनी के एक सेंटर में कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. कंपनी से जुड़ी एक और महिला कर्मचारी ने (pressure and torture for conversion) आरोप लगाया है कि उसे लगातार चार सालों तक कंपनी में मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. उसने प्रबंधन से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
पीड़िता बीते 11 वर्षों से कंपनी में कार्यरत है और पिछले सात वर्षों से नाशिक शाखा में टीम लीडर के पद पर काम कर रही है. उसने बताया कि उसने अपने सीनियर्स को कई बार शिकायत दी, लेकिन आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए. उसके अनुसार, कार्यालय में कुछ कर्मचारियों का एक समूह महिलाओं को निशाना बनाता था, उनके पहनावे, शरीर और पर्सनल लाइफ पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था.
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पीड़िता के आरोपों के मुताबिक, यह उत्पीड़न केवल जूनियर कर्मचारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि उसे भी, जो एक टीम लीडर है, लगातार निशाना बनाया गया. उसने बताया कि उसके विभाग में कुल छह टीम लीडर हैं और वे बैंकिंग कॉल्स से जुड़े कार्य संभालते हैं. कार्यस्थल पर दो शिफ्ट में काम होता है और लगभग 27 कर्मचारियों की निगरानी उसकी जिम्मेदारी है.
pressure and torture for conversion – पीड़िता ने बताया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां और महिलाओं के प्रति अश्लील नजरिया आम बात हो गई थी. साल 2022 की एक घटना का जिक्र करते हुए महिला ने बताया कि एक मीटिंग के दौरान एक सहकर्मी उसके शरीर को घूर रहा था, जिससे वह बेहद असहज हो गई और मीटिंग छोड़कर बाहर आ गई. उसने इस घटना की शिकायत प्रबंधन से की, लेकिन आरोपी के खिलाफ केवल विभाग बदलने जैसी हल्की कार्रवाई की गई.
