नागपुर: नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की आत्महत्या के मामले में नागपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अंबाझरी पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी निखिल तभाने ने छात्रा द्वारा लिखे गए ‘सुसाइड नोट’ को केस डायरी में शामिल नहीं किया था। डीसीपी नित्यानंद झा ने इस चूक को स्वीकार करते हुए जांच अधिकारी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। परिजनों का आरोप है कि सुसाइड नोट मिलने के बावजूद पुलिस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया।
🥀 नीट दोबारा परीक्षा का डर: सुसाइड नोट में छात्रा ने लिखी थी अपनी लाचारी
मध्यप्रदेश की 18 वर्षीय छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने 20 मई को नागपुर में आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद जब परिवार वाले उसकी किताबें खंगाल रहे थे, तब उन्हें एक सुसाइड नोट मिला। आकांक्षा ने लिखा था, “मम्मी-पापा, आप लोगों को भरोसा था कि मैं एक दिन डॉक्टर बनूंगी, लेकिन मेरे अंदर फिर से परीक्षा देने का साहस नहीं है। पहले मैंने अच्छे अंक हासिल किए थे, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि दोबारा ऐसा कर पाऊं। मुझे माफ करना, मैंने सब कुछ बर्बाद कर दिया।” नीट पेपर लीक और दोबारा परीक्षा होने की घोषणा के बाद से ही वह गहरे तनाव में थी।
💔 किसान पिता का सपना टूटा: 650 से अधिक अंक आने की थी उम्मीद
आकांक्षा के पिता नागपुर में बावर्ची का काम करते थे। पिता ने बताया कि परीक्षा देकर आने के बाद बेटी ने खुद कहा था कि उसे 650 से अधिक अंक आने की उम्मीद है। नीट पेपर लीक के बाद जब दोबारा परीक्षा की खबर आई, तो छात्रा का व्यवहार पूरी तरह बदल गया और वह मानसिक रूप से टूट गई थी। राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया था।
⚖️ पुलिस प्रशासन की सफाई: जांच अभी भी जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने परिजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मामले की तहकीकात की जा रही है। पहले यह स्पष्टीकरण दिया गया था कि केस डायरी में सुसाइड नोट का जिक्र नहीं था, इसलिए इसे संलग्न नहीं किया गया। फिलहाल, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की बारीकी से समीक्षा करने के आदेश दिए हैं।


