बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार तड़के लगी भीषण आग ने 6 मरीजों की जान ले ली, जबकि 21 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. शुरुआती जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल की 5वीं मंजिल पर बने आईसीयू (ICU) वार्ड के वेंटिलेटर में शॉर्ट सर्किट होने के कारण यह आग भड़की, जिसने (Muzaffarpur Hospital Fire Case) देखते ही देखते चंद मिनटों में पूरी मंजिल को अपनी भयावह चपेट में ले लिया.
Muzaffarpur Hospital Fire Case – इस हादसे में अस्पताल प्रबंधन की कई गंभीर लापरवाही भी उजागर हुई हैं; बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान अस्पताल की लिफ्ट पूरी तरह बंद थी और जीवन रक्षक माने जाने वाले इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) की सीढ़ी के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था.
घटना के दौरान लिफ्ट बंद होने और इमरजेंसी एग्जिट की सीढ़ी पर ताला लगा होने के कारण धुएं से घिरे लाचार मरीज और उनके परिजन अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर इधर-उधर भागते रहे. दम घुटने की स्थिति में कई लोगों ने खिड़कियों के कांच तोड़कर बाहर निकलने और हवा पाने की कोशिश की. जांच में यह भी सामने आया है कि जिस आईसीयू वार्ड की कुल स्वीकृत क्षमता मात्र 13 बेड की थी, वहां मुनाफे के चक्कर में नियमों को ताक पर रखकर 27 मरीजों को जबरन भर्ती किया गया था. आग लगने के बाद वेंटिलेशन न होने से पूरा आईसीयू जहरीले धुएं से भर गया और हालात हिटलर के गैस चैंबर जैसे हो गए.


