Mumbai News: मुंबई के कुर्ला और कल्याण से महाराष्ट्र ATS और दिल्ली स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के दो संदिग्धों से पूछताछ और जांच में नए खुलासे हुए हैं. जांच में पता चला है कि इनसे ऑनलाइन वीडियो, गेमिंग ऐप और कोड वर्ड वाले ऑडियो मैसेज के जरिए विदेशी हैंडलर्स लगातार संपर्क में थे. बात करने के लिए इन्हें दो नए नाम भी दिए गए थे. दिल्ली के अलावा लखनऊ, मुंबई भी इन्हें टारगेट दिया गया था. इतना ही नहीं टॉय कार बम कैसे बनाना है, कैसे ऑपरेट करना है, इसकी ट्रेनिंग भी इन्हें ऑनलाइन दी जा रही थी.
युवाओं का किया जा रहा था ब्रेनवॉश
देश में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें सामने आया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा है. जांच एजेंसियों, खासकर एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने पाया है कि आतंकी संगठन इंटरनेट, गेमिंग ऐप्स और चैट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहे हैं.
जांच में सामने आया है कि आतंकी संगठन युवाओं तक पहुंचने के लिए ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए पहले सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर युवाओं से दोस्ती की जाती है, फिर धीरे-धीरे उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया जाता है. कई मामलों में फर्जी आईडी और विदेशी हैंडलर्स के जरिए संपर्क साधा जाता है.
टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़
मुंबई में ATS और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. एक मामले में संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया गया, जो ऑनलाइन प्रचार के जरिए युवाओं को जोड़ रहा था. जांच में यह भी सामने आया कि विदेशी हैंडलर्स सोशल मीडिया के जरिए भारत में नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ मामलों में नाबालिगों को भी टारगेट कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेला गया.
सूत्रों के मुताबिक, मुंबई में भी ऐसे कई युवाओं पर नजर रखी जा रही है, जो ऑनलाइन प्रोपेगेंडा से प्रभावित हुए हैं. कुछ मामलों में 4-5 नाबालिगों के संपर्क में आने की बात भी सामने आई है, जिनकी काउंसलिंग और जांच की जा रही है. सवाल ये है कि आखिर इन युवाओं का ब्रेनवॉश कैसे किया जाता है? जांच एजेंसियों के अनुसार, यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है..
- पहले सामान्य बातचीत और दोस्ती.
- फिर धार्मिक या वैचारिक कंटेंट शेयर करना.
- उसके बाद कट्टरपंथी विचारधारा फैलाना.
- अंत में आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करना.
कई मामलों में युवाओं को वीडियो, मैगजीन, ऑडियो क्लिप और हिंसक कंटेंट दिखाकर प्रभावित किया जाता है. भाषा और संवाद की पूरी स्क्रिप्ट कोडवर्ड में होती है. ATS और अन्य एजेंसियों ने अभिभावकों और युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है. अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत से बचें, संदिग्ध लिंक या ग्रुप से दूर रहें और बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें
जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फैल रहा यह नेटवर्क देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं और समय-समय पर कार्रवाई कर इन नेटवर्क्स को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं.
मुम्बई से 2 पकड़े गए, परिवार ने कहा- मेरा बेटा ऐसा नहीं
महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की संयुक्त कार्रवाई में मुंबई और आसपास के इलाकों में छापेमारी कर दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है. जानकारी के मुताबिक, मुंबई के कुर्ला और ठाणे के खडावली इलाके से पकड़े गए इन आरोपियों की पहचान कामरान उर्फ सोनू उर्फ मोजे और बड़ा इमरान के रूप में हुई है. प्रारंभिक जांच में इनके तार प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है. फिलहाल दोनों से पूछताछ जारी है और आगे की जांच स्पेशल सेल को सौंप दी गई है.
टॉय कार बम से धमाके की साजिश
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी मुंबई और दिल्ली में बड़े पैमाने पर धमाके करने की साजिश रच रहे थे. इसके लिए टॉय कार (खिलौना गाड़ी) में विस्फोटक लगाकर हमले की योजना बनाई गई थी, ताकि सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दिया जा सके. प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों का ब्रेनवॉश ऑनलाइन माध्यम से किया गया हो सकता है. एजेंसियों को शक है कि जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क के जरिए इन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेला गया.
घटना के बाद मुंबई, दिल्ली सहित देश के अन्य प्रमुख शहरों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. रेलवे स्टेशन, सार्वजनिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. वहीं, पकड़े गए एक युवक के पिता जलालुद्दीन सिद्दीकी ने बेटे के निर्दोष होने का दावा किया है. उनका कहना है कि उनका बेटा हमाज सिद्दीकी पढ़ाई में अच्छा था और 10वीं में 68 प्रतिशत अंक हासिल किए थे.
जलालुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि बीते कुछ दिनों से बेटा गुमसुम रहने लगा था. अक्सर मोबाइल पर बात करता रहता था. परिवार को लगा कि वह पढ़ाई से जुड़ी बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा, हम चाहते थे कि वह आगे पढ़कर IAS या IPS बने और देश की सेवा करे. हमें लगता है कि उसे फंसाया गया है. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मॉड्यूल की गहन जांच में जुटी हैं. यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं. साथ ही क्या देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी कोई साजिश सक्रिय थी.


