मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद पर जबलपुर हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाले प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद पिछले कुछ वर्षों से विवाद के कारण रोके गए 13 प्रतिशत पदों को अनारक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों से भरने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, सभी भर्ती एजेंसियों (जैसे एमपीपीएससी और ईएसबी) को यह पूरी प्रक्रिया आगामी तीन महीने के भीतर पूरी करने को कहा गया है।
🔍 सितंबर 2022 से लागू 87:13 फार्मूले और अटकी परीक्षाओं पर असर
गौरतलब है कि ओबीसी आरक्षण विवाद के चलते सितंबर 2022 से राज्य में 87:13 प्रतिशत का फार्मूला अपनाया जा रहा था, जिसके तहत 87% पदों के परिणाम घोषित किए गए थे जबकि बाकी 13% पदों के परिणाम विवाद के अंतिम निर्णय तक रोक दिए गए थे। इस व्यवस्था के कारण राज्य सेवा परीक्षा (2019 से 2025 तक), वन सेवा, सहायक प्राध्यापक, आरक्षक भर्ती, शिक्षक भर्ती और चिकित्सा अधिकारी समेत लगभग 180 से अधिक परीक्षाओं के 1300 से ज्यादा पद होल्ड पर चले गए थे। हाईकोर्ट के इस ताजा निर्देश से इन सभी लंबित परीक्षाओं के परिणाम जारी होने और नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है।
🎯 युवाओं और अभ्यर्थियों में जगी उम्मीद, तीन महीने में पूरी होगी प्रक्रिया
नेशनल एजुकेशन यूथ यूनियन (नेयू) के पदाधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों का मनोबल बढ़ा है। हालांकि, भर्ती एजेंसियों को अभी आधिकारिक आदेश का इंतजार है, जिसके बाद शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी। तीन महीने की तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी होने से प्रभावित युवाओं को बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।


