भोपाल: उज्जैन में जमीन खरीद के मामले में उपजा सियासी बवाल अब मध्य प्रदेश से निकलकर दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक पहुँच गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए मध्य प्रदेश में तैनात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भरत यादव को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजभर का दावा है कि इस पूरे मामले में निवेश और जमीनों के तार कहीं न कहीं जुड़े हुए हैं।
⚖️ क्या बोले IAS भरत यादव?
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भरत यादव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने ETV भारत से बातचीत में कहा कि “राजभर द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यहीन हैं। इंदौर-उज्जैन संभाग में चल रही एक्सप्रेस-वे और ग्रीन फील्ड परियोजनाएं पूर्ववर्ती अधिकारियों के समय से शुरू हुई थीं, जिन्हें वे केवल आगे बढ़ा रहे हैं।”
🕵️ विवाद का केंद्र: अखिलेश यादव का बचाव और राजभर का हमला
अखिलेश यादव द्वारा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का बचाव करने के बाद ओम प्रकाश राजभर ने तीखा हमला किया। राजभर ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि भरत यादव का संबंध सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव के परिवार से है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की बौखलाहट के पीछे उन जमीनों में किए गए भारी निवेश का डर है, जहाँ से प्रस्तावित हाईवे गुजरने वाला है।
👤 कौन हैं IAS भरत यादव?
मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाले भरत यादव मध्य प्रदेश कैडर के एक अनुभवी आईएएस अधिकारी हैं। 2019 में वे ग्वालियर के कलेक्टर रहे और वर्तमान में 1 जनवरी 2025 से मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के चेयरमैन के पद पर कार्यरत हैं। वे शासन के विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
🎭 राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
जहाँ ओम प्रकाश राजभर ने इसे निवेश और रिश्तों का खेल बताया है, वहीं सपा प्रवक्ता यश भारतीय ने इसे भाजपा की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि “भाजपा खुद अपने ही मुख्यमंत्री को हटाना चाहती है और भरत यादव का इस कथित जमीन घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है।” उधर, कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी तंज कसते हुए कहा है कि “यदि अखिलेश को मोहन यादव से इतना ही प्यार है, तो उन्हें यूपी बुला लें।”


