भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों को हो रही परेशानियों को दूर करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में लंबित प्रकरण पर पूरी गंभीरता से नजर बनाए हुए है और हर पहलू को विधिक रूप से अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर रही है। डॉ. यादव ने आश्वस्त किया कि वर्तमान परिस्थितियों में सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापारियों की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी, व्यावहारिक और बेहतर समाधान निकालने की दिशा में हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।

🛕 प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में विकसित होगा जानापाव: भगवान परशुराम की तपोस्थली को मिलेगा नया रूप

जानापाव का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व:

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: जन्माष्टमी और कुशाभाऊ ठाकरे जयंती के अवसर पर जानापाव यात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वही पावन स्थल है, जहां महर्षि परशुराम जी ने भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था।

  • तीर्थ के रूप में विकास: इस विशिष्ट धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व को दृष्टिगत रखते हुए जानापाव को एक प्रमुख तीर्थस्थल और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाई गई है।

  • श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं: स्थल पर बुनियादी ढांचे, पहुंच मार्ग और दर्शन व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम अनुभव मिल सके।

🌟 ‘महाकाल लोक’ की तर्ज पर देवस्थानों का कायाकल्प: धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

धार्मिक स्थलों का विकास और आर्थिक प्रभाव:

  • पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि: मुख्यमंत्री ने बताया कि देवस्थानों के योजनाबद्ध विकास से मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व गति मिली है। ‘श्री महाकाल लोक’ के निर्माण के बाद उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में एक नया सांस्कृतिक वातावरण निर्मित हुआ है।

  • करोड़ों में पहुंची श्रद्धालुओं की संख्या: वर्ष 2022 तक जहां उज्जैन में वार्षिक रूप से लगभग 60 से 70 लाख श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर कई करोड़ तक पहुंच चुकी है।

  • स्थानीय रोजगार का सृजन: इसी सफलता को मॉडल बनाते हुए राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी समग्र विकास किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर व्यापार, आतिथ्य और स्वरोजगार के नए अवसरों का निरंतर सृजन हो सके।

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