भोपाल: मध्य प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और प्रशासनिक फेरबदल से पहले राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के मंत्रियों के कामकाज की व्यापक और कड़ी समीक्षा शुरू हो गई है। इसी रणनीतिक कवायद के तहत रविवार को सरकार के 20 दिग्गज मंत्रियों को सत्ता और संगठन के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष वन-टू-वन प्रस्तुत होना पड़ा। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों ने मंच पर आकर अपने विभागीय कार्यों, नवाचारों और अपने प्रभार वाले जिलों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड (Performance Report Card) पेश किया।
👥 शीर्ष नेतृत्व ने मंत्रियों से दागे 60 तीखे सवाल: जिलों के दौरे, रात्रि विश्राम और जनसंवाद का खंगाला गया पूरा रिकॉर्ड
इस बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल खुद मौजूद रहे। बंद कमरे में हुई इस बैठक के दौरान मंत्रियों से करीब 60 कड़े बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए गए। इनमें मुख्य रूप से मंत्रियों के अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित दौरे, ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम, जनता से सीधा जनसंवाद और जमीनी स्तर पर उनकी संगठनात्मक सक्रियता जैसे कड़े मुद्दे शामिल रहे।
⏱️ डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और विजय शाह की चली लंबी प्रस्तुति: प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय ने भी गिनाईं उपलब्धियां
पार्टी सूत्रों के अनुसार, समीक्षा के लिए प्रत्येक मंत्री के लिए लगभग 15 मिनट का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की प्रस्तुति और उनके विभागों पर चर्चा अपेक्षाकृत काफी लंबी चली। वहीं, वरिष्ठ मंत्री विजय शाह को भी करीब 20 मिनट तक मंच पर रहकर अपने कार्यों और रणनीतियों का पूरा ब्योरा देना पड़ा। इसके बाद इंदर सिंह परमार, प्रहलाद पटेल, उदय प्रताप सिंह, गौतम टेटवाल, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, कैलाश विजयवर्गीय, निर्मला भूरिया, लखन पटेल, दिलीप जायसवाल और नारायण सिंह पंवार सहित अन्य मंत्रियों ने सत्ता-संगठन के सामने अपनी विभागीय उपलब्धियां और भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।
🗳️ हारे हुए विधानसभा क्षेत्रों और कमजोर बूथों पर रहा विशेष फोकस: संगठन के सामने मंत्रियों ने भी रखीं अपनी जमीनी चुनौतियां
बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने न केवल अपने कामकाज का ब्योरा रखा, बल्कि कुछ मंत्रियों ने संगठन के शीर्ष नेताओं के सामने अपनी प्रशासनिक शिकायतें और ब्यूरोक्रेसी (अधिकारियों) से जुड़ी जमीनी चुनौतियां भी खुलकर साझा कीं। वहीं, कुछ मंत्रियों के शानदार प्रदर्शन की मंच से सराहना भी की गई। इस पूरी समीक्षा के दौरान संगठन ने खासतौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों और पोलिंग बूथों पर अपना फोकस केंद्रित किया, जहां पार्टी को पिछले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। मंत्रियों से सीधे पूछा गया कि उन कमजोर क्षेत्रों में संगठन को दोबारा मजबूत करने और आगामी चुनावों में रिकॉर्ड जीत सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने अब तक क्या ठोस रणनीति बनाई है।
🌾 गेहूं खरीदी और विपक्ष के आरोपों को बेअसर करने की बनी रणनीति: जनप्रतिनिधियों से बेहतर समन्वय बनाने के कड़े निर्देश
इसके अलावा, बैठक में जनप्रतिनिधियों (विधायकों-सांसदों) से मंत्रियों के आपसी समन्वय, जनता से निरंतर संपर्क, विभागों में किए गए नए तकनीकी नवाचार, जिलों में बड़ी आपराधिक या कानून-व्यवस्था की घटनाओं की रोकथाम और सरकार पर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के आक्रामक जवाब जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। विशेष रूप से किसानों से जुड़ी गेहूं खरीदी जैसे संवेदनशील विषयों पर विपक्ष के भ्रामक दावों को मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रभावी तरीके से खारिज करने की रणनीति पर भी मंत्रियों से जवाब तलब किया गया और उन्हें जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।
📌 नियमित प्रक्रिया या बड़े फेरबदल की आहट? मोहन कैबिनेट के आगामी स्वरूप पर पड़ेगा इस महा-समीक्षा का सीधा असर
राजनीतिक हलकों और समीक्षकों के बीच इस पूरी मैराथन कवायद को आगामी मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के विभागों में होने वाले फेरबदल से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी संगठन आधिकारिक तौर पर इसे एक नियमित संगठनात्मक समीक्षा प्रक्रिया बताकर शांत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अंदरखाने इसे आने वाले दिनों में होने वाले बड़े राजनीतिक फेरबदल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। प्रदेश में आगामी चुनावों और संगठनात्मक मजबूती को देखते हुए इस समीक्षा के दूरगामी परिणाम होंगे, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इसके नतीजे सरकार और मंत्रिमंडल दोनों के स्वरूप पर बड़ा असर डालेंगे।


