रांची: झारखंड में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को लेकर राज्य सरकार और शिक्षाविद लगातार प्रयास कर रहे हैं. नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल स्तर पर मातृभाषा में पढ़ाई को बढ़ावा देने की दिशा में कई पहल की जा रही हैं. इसी क्रम में अब यह प्रयास भी तेज हुआ है कि झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय (mother tongue will be heard in CBSE) भाषाओं को सीबीएसई बोर्ड के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाए.
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राज्य में पहले से ही झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) से संचालित सरकारी स्कूलों में जनजातीय भाषाओं से जुड़ी पढ़ाई कराई जा रही है. इसके तहत पलाश बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देना है, ताकि सीखने की प्रक्रिया सरल और प्रभावी बन सके.
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mother tongue will be heard in CBSE – झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) के माध्यम से संचालित इस कार्यक्रम में यूनिसेफ और लैंग्वेज लर्निंग फाउंडेशन (LLF) का तकनीकी सहयोग भी लिया जा रहा है. मातृभाषा आधारित शिक्षा के जरिए बच्चों की समझ, आत्मविश्वास और कक्षा में भागीदारी को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पलाश योजना के तहत कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने की व्यवस्था की गई है. इसमें नागपुरी, संताली, कुड़ुख, मुंडारी और हो जैसी स्थानीय भाषाओं को शामिल किया गया है.


