एमसीबी: जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब भरतपुर विकासखंड के 50 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर पहुंचे। एकता परिषद के बैनर तले एकत्र हुए इन ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर संतन देवी जांगड़े से मुलाकात की और अपनी समस्याओं का ज्ञापन सौंपा।
🌲 वन भूमि पर बेदखली का डर
ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि वे वर्षों से वन भूमि पर खेती और निवास कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें वन विभाग द्वारा बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है। इससे उनके सामने आवास और रोजी-रोटी का बड़ा संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि वन अधिकार अधिनियम के तहत पात्र परिवारों को पट्टे दिए जाएं और जब तक उनके दावों का निराकरण न हो जाए, तब तक बेदखली की कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
🚶 लंबी संघर्ष यात्रा और प्रशासन की प्रतिक्रिया
लगभग 150 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा तय करके जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को मामले की विस्तृत जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
📢 राजनीति तेज: पूर्व विधायक ने सरकार को घेरा
इस प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘सुशासन’ के दावे के बावजूद ग्रामीणों को अपनी बुनियादी मांगों के लिए इतना लंबा संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भरतपुर-सोनहत क्षेत्र में जनसमस्याओं के समाधान की गति बेहद धीमी है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि वन अधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को अविलंब गंभीरता दिखानी चाहिए।


