बिलासपुर/मरवाही (छत्तीसगढ़): मरवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत जंगल में बीमारी से एक मादा भालू की मौत का मामला सामने आया है। मौत के उपरांत जंगल में पड़े शव को देखकर मवेशी चराने पहुंचे दो चरवाहों ने भालू के पिछले पैर के चार नाखून उखाड़ लिए।
गुरुवार की सुबह जब वन अमले को भालू की मौत की खबर मिली, तब निरीक्षण के दौरान नाखून गायब पाए गए। वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपित चरवाहों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अंधविश्वास के चलते नाखून का ताबीज बनाकर पहनने के लिए उन्हें निकाला था।
🌲 उसाड़ परिसर कक्ष क्रमांक 2035 का मामला: फेफड़ों में संक्रमण से हुई थी मादा भालू की मौत
घटनाक्रम और पोस्टमार्टम रिपोर्ट:
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घटनास्थल: यह घटना मरवाही वनमंडल के उसाड़ परिसर कक्ष क्रमांक 2035 की है, जहां बुधवार शाम एक मादा भालू की मृत्यु हो गई थी।
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अंगों की स्थिति: गुरुवार सुबह वनकर्मियों की सूचना पर जब उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचे, तो जांच में भालू के पिछले दाएं पैर के चार नाखून गायब मिले, जबकि शरीर के अन्य सभी अंग पूरी तरह सुरक्षित थे।
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प्राकृतिक मौत की पुष्टि: नाखून गायब होने के कारण शुरुआत में शिकार का संदेह जताया गया। हालांकि, पशु चिकित्सक द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में यह प्रमाणित हुआ कि भालू के फेफड़ों में गंभीर संक्रमण (Infection) था और उसकी मृत्यु पूरी तरह प्राकृतिक कारणों से हुई थी।
🐕 ATR की स्निफर डॉगी ‘नीतू’ ने पहुंचाया आरोपियों तक: घर से बरामद हुए भालू के नाखून
जांच प्रक्रिया और आरोपियों की गिरफ्तारी:
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स्निफर डॉग की मदद: संदिग्धों की सटीक पहचान के लिए अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) की प्रशिक्षित स्निफर डॉगी ‘नीतू’ को हैंडलर के साथ मौके पर बुलाया गया।
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सुराग से गिरफ्तारी: शव के समीप आरोपियों द्वारा छुई गई वस्तुओं की गंध के आधार पर डॉगी नीतू सीधे आरोपियों के घर तक पहुंच गई।
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आरोपियों की पहचान: पकड़े गए आरोपियों की पहचान ग्राम बरौर निवासी सुदर्शन यादव और सूरज सहिस के रूप में हुई है। पहले इनकार करने के बाद दोनों ने जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद उखाड़े गए चारों नाखून जब्त कर लिए गए।
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कानूनी धाराएं: आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं अधिकारियों की मौजूदगी में भालू के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
🧿 अंधविश्वास और कुरीतियों का शिकार: ताबीज और शक्ति के भ्रम का वैज्ञानिक आधार शून्य
मान्यताएं बनाम वैज्ञानिक तथ्य:
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प्रचलित अंधविश्वास: भालू के नाखून को ताबीज बनाकर गले या बाजू में पहनने की प्रथा प्राचीन लोक-विश्वासों और भ्रामक धारणाओं से जुड़ी है।
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भ्रामक दावे: कुछ लोग इसे बुरी नजर, नकारात्मक ऊर्जा और भूत-प्रेत से रक्षा का साधन मानते हैं, जबकि कई क्षेत्रों में इसे शारीरिक बल और साहस का प्रतीक समझकर बच्चों व पुरुषों को पहनाया जाता है।
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वैज्ञानिक सच्चाई: आधुनिक विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र में इन दावों का कोई प्रमाण नहीं है। भालू का नाखून धारण करने से किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य, बल या सुरक्षा में कोई वृद्धि नहीं होती; यह केवल वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाला अंधविश्वास है।
🗣️ ‘बीमारी से हुई थी मौत, नाखून ले जाने वाले तत्काल पकड़े गए’: डीएफओ कुमार निशांत का वक्तव्य
वन विभाग का आधिकारिक बयान:
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त्वरित कार्रवाई: डीएफओ मरवाही वनमंडल कुमार निशांत ने बताया कि मादा भालू की मृत्यु गंभीर बीमारी और फेफड़ों के संक्रमण से हुई थी।
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सतर्कता का संदेश: मौत के बाद मौके का फायदा उठाकर दो चरवाहे उसके नाखून निकाल ले गए थे, जिन्हें विभाग ने फौरन धर दबोचा है। उन्होंने जनता से वन्यजीव अंगों की तस्करी या अंधविश्वास में न पड़ने की अपील की है।


