सुकमा: एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब सुकमा के कलेक्टर अमित कुमार का काफिला दूरस्थ गांवों के दौरे पर था और उनकी नजर सड़क किनारे महुआ बीनती (magical initiative of collector) एक मासूम बच्ची पर पड़ी.यह सिर्फ एक सामान्य मुलाकात नहीं थी, बल्कि उस मासूम के भविष्य की दिशा बदलने वाली एक नई शुरुआत थी.
खेतों के बीच काफिला रोककर बच्चों से की बात
शुक्रवार को कलेक्टर अमित कुमार सुकमा के दूरस्थ क्षेत्रों के दौरे पर थे. वे मारोकी, मानकापाल, परिया और कुचारास जैसे नक्सल प्रभावित गांवों के निरीक्षण पर निकले थे. इन इलाकों में प्रशासन का पहुंचना ही लोगों के लिए किसी बड़े भरोसे से कम नहीं होता.इसी दौरान सड़क किनारे पेड़ों के नीचे कुछ बच्चे महुआ बीनते नजर आए.
महुआ बीन रही बच्ची से की मुलाकात
तपती दोपहर में छोटे-छोटे हाथ जंगल की जमीन से महुआ चुन रहे थे. कलेक्टर की नजर जैसे ही उन बच्चों पर पड़ी, उन्होंने तुरंत अपना काफिला रुकवा दिया.वे सीधे खेतों और पेड़ों के बीच उस बच्ची के पास पहुंच गए. बच्ची थोड़ी झिझकी, लेकिन कलेक्टर के आत्मीय व्यवहार ने जल्द ही उसकी झिझक दूर कर दी. बातचीत के दौरान बच्ची ने अपना नाम मड़कामी मंगली बताया.
प्रशासन की मदद से खिला परिवार का चेहरा
उन्होंने पालकों से पूछा कि क्या बच्चे को स्कूल भेजने में कोई परेशानी है आर्थिक, दूरी या किसी अन्य कारण से माता-पिता ने अपनी मजबूरियां बताईं, लेकिन कलेक्टर ने उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रशासन हर संभव मदद (magical initiative of collector) करेगा.कलेक्टर की संवेदनशीलता और समझाइश का असर यह हुआ कि मंगली के माता-पिता तुरंत उसे दोबारा स्कूल भेजने के लिए तैयार हो गए.
