महाराष्ट्र में फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स से जुड़े गिग वर्कर्स के वेरिफिकेशन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है. सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और कथित भेदभाव के आरोपों के बीच राज्य सरकार सख्त एसओपी लाने की तैयारी में है. बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही Swiggy, Zomato और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म से (conspiracy to harass the poor) जुड़े डिलीवरी कर्मियों के लिए अनिवार्य पहचान और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन लागू कर सकती है.
बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने इस मुद्दे को उठाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि गिग वर्क सेक्टर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए काम कर रहे हैं, जिनमें कुछ आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने मांग की कि डिलीवरी कर्मचारियों की पासपोर्ट जैसी सख्त जांच हो. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए गृह और श्रम विभाग की बैठक में एसओपी लागू करने का फैसला लिया है.
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सूत्रों के मुताबिक, अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जमीनी स्तर पर गिग वर्कर्स के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है. कुछ डिलीवरी कर्मियों और ओला उबर वालों का का कहना है कि मौजूदा थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन सिस्टम कमजोर है, जिससे बाहरी लोगों की घुसपैठ संभव है. ऐसे में सख्त जांच जरूरी है ताकि ईमानदार कर्मचारियों पर शक न हो.
conspiracy to harass the poor – कई वर्कर्स ने चिंता जताई कि जांच के नाम पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. उनका कहना है कि वे वैध दस्तावेजों के साथ काम कर रहे हैं और धर्म या पहचान के आधार पर टारगेट करना गलत है. इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है. समाजवादी पार्टी नेता अबू आसिम आजमी, AIMIM के वारिश पठान और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए की जा रही है.


