मध्य प्रदेश में अवैध रूप से खनिज परिवहन करने वाले ट्रक और डंपर अब सरकारी खजाने को चूना नहीं लगा सकेंगे। राज्य शासन ने खनिज वाहनों की सटीक निगरानी और उनका पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए फास्टैग (FASTag) की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है। खनिज विभाग के प्रमुख सचिव विवेक कुमार पोरवाल ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से खनिज चोरी पर प्रभावी अंकुश लगेगा और राजस्व में इजाफा होगा।

🔍 40 से ज्यादा एआई आधारित ई-चेक गेट तैनात, नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने वालों पर कसेगा शिकंजा

अब तक अवैध परिवहन पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश भर में 40 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मानव रहित ई-चेक गेट बनाए गए हैं, जहां से गुजरने वाले वाहनों के नंबर स्कैन होते थे। हालांकि, कई बार डंपर चालक कार्रवाई से बचने के लिए जानबूझकर नंबर प्लेट हटा देते थे या उन पर मिट्टी पोत देते थे ताकि वाहन का रिकॉर्ड दर्ज न हो सके। इस समस्या से निपटने के लिए अब प्रत्येक खनिज वाहन पर फास्टैग होना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे वाहन के नंबर से लेकर उसमें लोड खनिज की मात्रा और गंतव्य मार्ग तक की पूरी जानकारी ऑटोमैटिक तरीके से सिस्टम में दर्ज हो जाएगी।

🚫 फास्टैग से छेड़छाड़ करने पर होगी सख्त कार्रवाई, वाहन का पंजीयन भी होगा निरस्त

खनिज विभाग के नए आदेश के अनुसार, यदि कोई वाहन चालक फास्टैग को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश करता है, तो ऐसे वाहन को तुरंत प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। साथ ही, वाहन का पंजीयन (Registration) निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। चेक गेट से निकलते ही कंप्यूटर में वाहन का पूरा डेटा ऑटोमैटिक सेव हो जाएगा, जिससे अधिकारियों को अवैध परिवहन की गतिविधियों पर रियल-टाइम निगरानी रखने में मदद मिलेगी।

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