जबलपुर। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने फर्जी गोंड (अनुसूचित जनजाति – ST) जाति प्रमाण पत्र के आधार पर पुलिस विभाग में लगभग 28 वर्षों तक नौकरी की और पदोन्नत होकर सब इंस्पेक्टर (SI) के पद (Madhya Pradesh Crime News) तक पहुंच गया। मामले की शिकायत के बाद हुई दो अलग-अलग विभागों की उच्चस्तरीय जांच में जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध पाया गया।
पूरा मामला सिविल लाइंस जबलपुर निवासी सब इंस्पेक्टर अमिताभ प्रताप सिंह उर्फ अमिताभ थियोफिलस से जुड़ा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमिताभ ने वर्ष 1998 में जबलपुर कलेक्ट्रेट कार्यालय से गोंड अनुसूचित जनजाति श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र बनवाया था। इसी प्रमाण पत्र का उपयोग कर उन्होंने पुलिस विभाग में नौकरी हासिल की। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब भोपाल के कोलार रोड निवासी प्रमिला तिवारी उपाध्याय ने अक्टूबर 2024 में इस संबंध में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
एसडीएम और डीएसपी की जांच में नहीं मिला कोई पुराना रिकॉर्ड
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर जबलपुर ने जांच के आदेश दिए। कलेक्टर के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम रांझी आरएस मरावी और पुलिस विभाग की ओर से डीएसपी विजय सिंह गोठरिया ने मामले की संयुक्त रूप से गहन जांच की। जांच के दौरान अमिताभ के जाति से संबंधित सभी पुराने प्रशासनिक रिकॉर्ड खंगाले गए।अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 1980 से पहले अमिताभ या उनके पूर्वजों के पास गोंड जनजाति से संबंधित होने का कोई भी प्रामाणिक दस्तावेज मौजूद नहीं था।
