जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के दस अवतार हैं. इन अवतारों में से ही एक है भगवान परशुराम. भगवान परशुराम विष्णु जी के छठवें अवतार हैं. माना जाता है कि भगवान परशुराम आज (Lord Parashuram Ki Katha) भी धरती पर वास कर रहे हैं. परशुराम भगवान का नाम राम था, लेकिन जब भगवान शिव ने उनको एक दिव्य फरसा दिया तो उनका नाम परशुराम पड़ गया.
Lord Parashuram Ki Katha – भगवान परशुराम के पिता का नाम महर्षि जमदग्नि और उनकी माता का नाम रेणुका था. श्री हरुि विष्णु ने माता रेणुका के गर्भ से शुक्र की आंशिक उर्जा से परशुराम के रूप में जन्म लिया था. उनका कुल ब्राह्मण था, लेकिन वो स्वभाव और कर्म से क्षत्रिय के रूप में जाने जाते हैं. परशुराम जी को बहुत बड़े पितृ भक्त के रूप में भी जाना जाता है. उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए अपनी मां का सिर काट दिया था. फिर उन्होंने पिता से तीन वरदान मांगे थे. आइए इस कथा के बारे में विस्तार से जानते हैं.
महर्षि जमदग्नि ने बेटों को दिया श्राप
महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पांच बेटे थे. उन्होंने सबको बुलाया. सबसे पहले उन्होंने अपने सबसे बड़े बेटे को आदेश दिया कि अपनी मां का सिर काट दो. बेटे ने कहा कि आपकी आज्ञा हो तो मैं अपने प्राण दे सकता हूं, लेकिन मां के प्राण नहीं ले सकता. फिर उन्होंने क्रोध में बेटे को विवेकहीन हो जाने का श्राप दे दिया. इसी तरह तीनों बेटों ने मना कर दिया और सभी को महर्षि जमदग्नि ने विवेकहीन हो जाने का श्राप दे दिया.
परशुराम जी ने काटा मां सिर और मांगे वरदान
अंत में उन्होंने परशुराम जी को बुलाया और बाकी सब की तरह उन्हें भी मां का सिर काट देने के लिए कहा. परशुराम जी ने बिना एक पल विचार किए पिता की आज्ञा का पालन करते हुए माता रेणुका का सिर काट दिया. ये देखकर महर्षि जमदग्नि बहुत प्रसन्न हुए और बेटे से वरदान मांगने के लिए कहा. तब परशुराम जी ने तीन वरदान मांगे. परशुराम जी ने पहले वरदान के रूप में माता रेणुका का जीवन मांगा. दूसरे वरदान के रूप में परशुराम ने ये मांगा की मां को कभी याद न रहे कि मैंने उनका सिर काट दिया था. तीसरे और अंतिम वरादन के रूप में उन्होंने पिता से अपने भाइयों की चेतना मांगी.


