इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौत और बीमार होने की घटनाओं के बाद अब नोएडा प्राधिकरण भी पूरी तरह सतर्क हो गया है. ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा वन और अल्फा 2 सेक्टर में भी दूषित पानी पीने से 65 लोग बीमार हो गए. अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने जल आपूर्ति व्यवस्था की (65 people admitted to hospital) व्यापक समीक्षा के आदेश दिए हैं. इसके तहत पाइपलाइनों में रिसाव, जंग, सीवर मिक्सिंग और जलाशयों की गुणवत्ता की जांच के लिए एक हाईपावर तकनीकी समिति गठित की गई है.

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हाईपावर तकनीकी समिति का मुख्य काम शहर की पानी की सप्लाई से जुड़ी पूरी चेन की जांच करना है. इसमें यह देखा जाएगा कि कहीं पाइपलाइनों में जंग या लीकेज के कारण सीवर का पानी तो नहीं मिल रहा कहीं ड्रेनेज और जलापूर्ति लाइनें आपस में जुड़ तो नहीं गईं और वॉटर एटीएम व जलाशयों में सप्लाई किया जा रहा पानी मानकों पर खरा उतरता है या नहीं. समिति शहर के अलग-अलग सेक्टरों से सैंपल लेकर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी ताकि भविष्य में इंदौर जैसी कोई घटना नोएडा में न हो.

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65 people admitted to hospital – शहर में बढ़ती गंदगी और साफ-सफाई की खराब स्थिति को देखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग पर भी सख्त रुख अपनाया गया है. समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई इलाकों में नालों की सफाई ठीक से नहीं हो रही, जिससे गंदगी और संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है. इसी लापरवाही को आधार बनाकर जन स्वास्थ्य विभाग के चार में से तीन सहायक परियोजना अभियंताओं उमेश चंद,राहुल गुप्ता और सुशील कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है.

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