श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में आतंक के पूरी तरह सफाए के लिए सुरक्षा बलों द्वारा लगातार कड़ा अभियान चलाया जा रहा है. इस बीच एक ऐसी अनोखी और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और जांचकर्ताओं को भी हैरत में डाल दिया है. प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक पाकिस्तानी आतंकी, जो भारत में अवैध घुसपैठ कर घाटी में हिंसक आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने और स्लीपर नेटवर्क खड़ा करने के मकसद से आया था, उसने ऑपरेशन के बीच अपने एक अनोखे निजी शौक को पूरा करने के लिए श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट करा लिया. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बताया कि इस गिरफ्तार आतंकी का नाम मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ चीनी है, जो मूल रूप से पाकिस्तान के लाहौर का रहने वाला है और लश्कर का एक प्रशिक्षित ऑपरेटिव है.
💬 पूछताछ में हुए कई सनसनीखेज खुलासे: पाकिस्तान के ट्रेनिंग कैंपों की खुली पोल, कश्मीर की असल जिंदगी देख बदला मन
अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में गिरफ्तार किए गए इस आतंकी से जब एनआईए और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त पूछताछ की, तो उसने कई अहम और चौंकाने वाले राज उगले. जट्ट ने बताया कि उसे पाकिस्तान स्थित आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में कश्मीर की जमीनी स्थिति को लेकर बिल्कुल अलग और मनगढ़ंत तस्वीर दिखाई गई थी. लेकिन जब वह उत्तरी कश्मीर के रास्ते भारत में घुसा और उसने यहां का सामान्य, शांतिपूर्ण जनजीवन देखा, तो वह दंग रह गया. अधिकारियों के अनुसार, आतंकी ने दावा किया कि यहां की वास्तविक और खुशहाल स्थिति देखने के बाद उसके उद्देश्यों में बदलाव आने लगा था. हालांकि, उसे उत्तर और मध्य कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने और जम्मू-कश्मीर के बाहर भी स्लीपर सेल तैयार करने के कड़े निर्देश दिए गए थे.
💇 बाल झड़ने की समस्या से प्रभावित था आत्मविश्वास: OGW नेटवर्क की मदद से श्रीनगर के क्लिनिक में गुज़ारीं रातें
पूछताछ के दौरान उस्मान जट्ट ने स्वीकार किया कि वह काफी समय से बाल झड़ने (Hair Fall) की गंभीर समस्या से परेशान था, जिससे उसका आत्मविश्वास लगातार गिर रहा था. उसे पहले से हेयर ट्रांसप्लांट तकनीक के बारे में जानकारी तो थी, लेकिन वह समझता था कि यह सुविधा केवल पश्चिमी देशों में ही उपलब्ध एक बेहद महंगी प्रक्रिया है. श्रीनगर के ऊपरी इलाकों में रहने के दौरान उसकी मुलाकात लश्कर के पुराने आतंकी जरगाम और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा से हुई. इसी दौरान एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क के जरिए जट्ट को शहर के एक स्थानीय दुकानदार से मिलवाया गया. जब जट्ट को पता चला कि उस दुकानदार ने खुद हेयर ट्रांसप्लांट कराया हुआ है, तो उसने उससे मदद मांगी. आखिरकार, दुकानदार की सेटिंग से श्रीनगर शहर के ही एक क्लिनिक में गुपचुप तरीके से उसका हेयर ट्रांसप्लांट कराया गया, जिसके लिए उसे कई बार क्लिनिक में रात भी गुजारनी पड़ी.
🚌 जम्मू से पंजाब के मालेरकोटला तक का सफर: तुर्की धारावाहिक देखकर सीख रहा था अंग्रेजी
हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद जट्ट ने अपनी पहचान छुपाने के लिए नया लुक अपनाया. इसके बाद वह अबू हुरैरा के साथ तालमेल बनाकर यात्री वाहनों की मदद से जम्मू पहुंचा और फिर वहां से एक स्लीपर बस के जरिए पंजाब के मालेरकोटला चला गया. एनआईए की जांच में यह बेहद दिलचस्प बात सामने आई है कि पंजाब में सुरक्षित छिपकर रहते हुए वह लगातार तुर्की के मशहूर धारावाहिक (Turkish Series) देखा करता था और भारत से बाहर निकलने की तैयारी के तहत अंग्रेजी भाषा सीखने की कोशिश कर रहा था.
📄 फर्जी पहचान पत्र बनाकर भारत से भागने का था मास्टरप्लान: ‘उमर उर्फ खरगोश’ मॉड्यूल की तर्ज पर रची थी साजिश
आतंकी मोहम्मद उस्मान जट्ट ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह भारत में रहते हुए स्थानीय स्तर पर फर्जी पहचान पत्र (जैसे पहचान दस्तावेज और पैन कार्ड) तैयार करवा रहा था ताकि इनकी मदद से बाद में फर्जी पासपोर्ट हासिल कर देश से आसानी से भाग सके. अधिकारियों के मुताबिक, वह हूबहू ‘उमर उर्फ खरगोश’ नामक एक अन्य पाकिस्तानी आतंकी की तर्ज पर भारत छोड़ने की फिराक में था. उमर भी कराची का रहने वाला था, जिसने 2012 के बाद भारत में घुसपैठ की थी और साल 2024 में राजस्थान के जयपुर से कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट बनवाकर देश से भागने में सफल रहा था, जिसके बाद वह इंडोनेशिया और खाड़ी देशों में छुपा हुआ है.
🕸️ लश्कर के ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क का भंडाफोड़: श्रीनगर पुलिस और एनआईए की बड़ी कामयाबी
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उस्मान जट्ट की गिरफ्तारी और उसकी निशानदेही से श्रीनगर तथा उत्तरी कश्मीर में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा के ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क का एक बहुत बड़ा और खतरनाक ढांचा ध्वस्त हुआ है. जट्ट को पिछले महीने श्रीनगर पुलिस ने लश्कर के सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले कमांडर अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा के साथ एक साझा ऑपरेशन में दबोचा था. मामले के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को देखते हुए अब इसकी कमान एनआईए (NIA) को सौंप दी गई है. सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि इस नेटवर्क के तार नवंबर 2025 में पकड़े गए ‘अल फलाह मॉड्यूल’ से तो नहीं जुड़े हैं, जिसमें कुछ शिक्षित लोगों और डॉक्टरों के कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप सामने आए थे.


