केंद्र सरकार ने शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को रद्द कर दिया था. इसके बाद भी लद्दाख में 16 मार्च को होने वाले विरोध प्रदर्शन (front against center) निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे. माना जा रहा था कि वांगचुक की रिहाई के बाद विरोध प्रदर्शन अब नहीं होगा. दरअसल 13 मार्च को कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस ने ऐलान किया था कि लद्दाख के लोग एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे क्योंकि गृह मंत्रालय केंद्र शासित प्रदेश द्वारा मांगी गई गारंटी देने में आनाकानी कर रहा है.
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लद्दाख में केडीए और शीर्ष निकाय लेह नामक संगठन राज्य का सामाजिक-राजनीतिक और धार्मिक समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं. बताया जा रहा है कि इन संगठनों से केंद्र की बात चल रही है. लद्दाख प्रशासन के सदस्य सज्जाद कारगिल ने कहा कि लद्दाख जिन संवैधानिक गारंटियों की मांग कर रहा है, वह कोई “व्यक्तिगत मामला” नहीं बल्कि एक सामूहिक चिंता का विषय है. उन्होंने कहा, “वांगचुक की रिहाई से हमें बहुत राहत मिली है.
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front against center – इससे पहले केडीए नेता असगर अली करबलाई ने कहा था कि लोगों का धैर्य टूट चुका है. हम भारत सरकार को बताना चाहते हैं कि हम शांत नहीं बैठेंगे. हम अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे. इसका प्रमुख हिस्सा राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल होना है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सोचती है, लद्दाखी जनता को हल्के में लिया जा सकता है. उन्हें लगता है कि गृह मंत्रालय पर उन पर कोई एजेंडा थोपना चाहता है. लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा.


