विगत दशकों में किडनी (Kidney) की बीमारियां काफी तेजी से बढ़ी है। विख्यात मेडिकल जर्नल लांसेट में छपी खबर के अनुसार 2040 तक क्रॉनिक किडनी डिजीज मनुष्य की मृत्यु का पांचवा प्रमुख कारण हो जाएगी। दुनिया में इस वक्त 85 करोड किडनी के पेशेंट है तथा हर साल 50 लाख व्यक्ति किडनी (Kidney) की बीमारी के कारण काल का ग्रास बन जाते हैं। फरीदाबाद स्थित फोर्टिस एक्सॉटर्स हॉस्पीटल के सीनियर कंसल्टैंट नेफ्रोलॉजी डॉ. तेजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि हमारे देश में भी प्रतिवर्ष ढाई लाख से ज्यादा व्यक्तियों की किडनी पूरी तरह खराब हो जाती है तथा उन्हें जीवित रहने के लिए डायलिसिस या ट्रांसप्लांट करवाना पड़ता है।
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देश में मेडिकल क्रांति, व्यापक मेडिकल इंश्योरेंस कवरेज, आयुष्मान योजना आदि के बावजूद भी यह स्थिति क्यों बनी है? यह देखकर दुख या आश्चर्य होता है कि इस इंटरनेट के युग में किडनी की बीमारियों का बढ़ने का प्रमुख कारण अज्ञानता है।किडनी की बीमारी शुरुआत में लक्षण नहीं होते हैं। 50 प्रतिशत मरीजों को किडनी के पूरी तरह खराब खराब होने के बाद ही लक्षण आते हैं यही कारण है की किडनी का इलाज देर से शुरू होता है या बीमारी लाइलाज दशा में पहुंच जाती है। वही से इस भ्रांति का जन्म होता है की किडनी की बीमारियां लाइलाज है।
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Kidney – यद्यपि किडनी कुछ अपनी बीमारियां भी होती हैं लेकिन आंकड़ों के हिसाब से समाज में फैली हुई प्रमुख बीमारियां जैसे कि डायबिटीज एवं ब्लड प्रेशर, गुर्दे की पथरी, पेशाब संबंधी दिक्कतें ही किडनी के खराब होने के प्रमुख कारण हैं।डॉ. तेजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि हमारे मन में यह प्रश्न उठना चाहिए कि अगर हमको उपरोक्त में से कोई भी बीमारी है तो क्या हमें हमारी किडनी की स्थिति के बारे में पता है? 40 साल से ऊपर के हमेशा कितने व्यक्तियों को अपने किडनी की रिपोर्ट के बारे में पता है?क्या हमारे चिकित्सक द्वारा लिखी दवाइयों में किडनी का ख्याल रखा गया है?
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डॉ. तेजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि आइए 10 मार्च को मनाए जाने वाले वर्ल्ड किडनी दिवस को यह प्रण ले। कि कि अगर हमें डायबिटीज ,ब्लड प्रेशर गुर्दे की पथरी ,पेशाब संबंधी कोई दिक्कत, हृदय और लीवर की बीमारियां आदि है या अगर व्यक्ति की उम्र 40 साल से ज्यादा है तो उन्हें अपने किडनी की जांच जरूर करनी चाहिए। किडनी की जांच महंगी नहीं है आसानी से हो जाने वाले दो टेस्ट यूरिन रूटीन तथा सिर मक्रिएटनीन, यह दो टेस्ट है इनसे किडनी की बीमारी का 90 प्रतिशत से ज्यादा पता लग सकता है। किडनी की गड़बड़ी का पता लगने पर घबराने की आवश्यकता नहीं है, जल्दी पता लगने पर यह पूरी तरह ठीक की जा सकती है तथा एडवांस दशा पर भी नेफ्रोलॉजिस्ट की मदद से कंट्रोल की जा सकती है।
