खूंटी नगर पंचायत चुनाव भले ही कागजों पर गैर-दलीय हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. इस चुनाव ने अब स्थानीय निकाय की सीमाएं लांघते हुए राज्यस्तरीय राजनीतिक प्रतिष्ठा (Khunti Nikay Chunav 2026) का रूप ले लिया है. भाजपा, कांग्रेस और झामुमो तीनों दलों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे खूंटी सियासी अखाड़ा बन गया है.
त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है. कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार मनोनीत बोदरा, झामुमो समर्थित सोनम बागे और भाजपा समर्थित पूर्व नगर अध्यक्ष रानी टूटी मैदान में हैं. तीनों दल खुले तौर पर प्रचार में जुटे हैं, जिससे चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है. अध्यक्ष पद के साथ-साथ 19 वार्डों में पार्षद पद के लिए 77 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. नाम भले ही निर्दलीय हों, लेकिन वार्ड स्तर पर भी दलों की सक्रियता साफ दिखाई दे रही है.
बाबूलाल और अर्जुन मुंडा ने संभाला मोर्चा
भाजपा ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है. पार्टी के लिए प्रचार की कमान राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा ने संभाली है. दोनों नेताओं ने मंच से भाजपा समर्थित (Khunti Nikay Chunav 2026) उम्मीदवार रानी टूटी की जीत का दावा करते हुए कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर मैदान में उतरने की अपील की. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि खूंटी में जीत सिर्फ नगर पंचायत की नहीं, बल्कि झारखंड की दिशा तय करेगी. वहीं अर्जुन मुंडा ने भी संगठन को पूरी ताकत से जुटने का संदेश दिया.


