होली को लेकर लोगों में अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है. वहीं, काशी की मसाने की होली खेलने के लिए देशभर से लोग आते हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों से इस पर विवाद होता रहा है. इसबार भी कुछ संगठनों ने इसका विरोध किया है. प्रशासन से मसाने की होली पर रोक लगाने की मांग की है. हालांकि, प्रशासन की तरफ से इस (masane ki holi) पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है. काशी विद्वत परिषद ने इस पर कई सवाल उठाए हैं.
चिता भस्म और मसाने की होली पर पिछले साल की तरह इस बार भी फिर से विवाद खड़ा हो गया है. अभी ये तय नहीं हुआ है कि प्रशासन की तरफ से मसाने की होली पर कोई रोक लगी है या नही. पिछले साल की तरह इस साल भी काशी विद्वत परिषद, काशी धर्म परिषद और सनातन धर्म रक्षक दल जैसी संस्थाएं इसके विरोध में है. लेकिन पिछले साल भी ये संस्थाएं विरोध में थी बावजूद इसके मसाने की होली और चिता भस्म की होली में खूब हुदंगई हुई थी.
काशी विद्वत परिषद के प्रवक्ता और बीएचयू में ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष विनय पाण्डेय ने कहा कि श्मशान में एक अनुशासन और मर्यादा की आवश्यकता होती है. कौन श्मशान जा सकता है? क्यूं जा सकता हैं और श्मशान से आकर क्या करेगा? इन सबके लिए एक नियम है और आप वहां अराजक होकर होली खेलेंगे वो भी परम्परा के नाम पर. काशी में ऐसी कोई परम्परा नही है.
masane ki holi – वहीं काशी धर्म परिषद के सचिव वेद प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि शास्त्र में लिखा है कि भूत भावन अपने गणों के साथ, भूत पिशाच के साथ औघड़ रूप में होली खेलते हैं. लेकिन भगवान शिव अघोर पंथ की मान्यता के अनुसार होली खेलते हैं. तो उनके तरह का कॉस्टयुम पहनकर हंगामा करने से, परम्परा की दुहाई देकर महाश्मशान में आए लोगों को दुःख देकर कौन सा त्यौहार मना रहे हैं.


