लखनऊ : योगी आदित्यनाथ सरकार की धार्मिक पर्यटन नीति के दृष्टिकोण से देखें, तो पवित्र कांवड़ यात्रा में उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों का स्पष्ट रोडमैप दृष्टिगोचर होता है। भगवा वस्त्रों में आच्छादित लाखों श्रद्धालु, कंधों पर सजी आकर्षक कांवड़ें और ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘बोल बम’ के गगनभेदी जयघोष के बीच आगे बढ़ता (kanwar yatra gives impetus to economy) अपार जनसैलाब न केवल जन-आस्था का प्रतीक है, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति का भी एक सशक्त संकेतक बनकर उभरा है।
kanwar yatra gives impetus to economy – वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, अयोध्या, विंध्याचल और अन्य स्थानीय धार्मिक स्थल, जो आज धार्मिक पर्यटन के माध्यम से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं, कांवड़ यात्रा उसी विशाल श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस यात्रा को सुरक्षित और वैश्विक स्वरूप प्रदान करने के लिए व्यापक संसाधन उपलब्ध कराए हैं, जिसके मूल में उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का दूरगामी संकल्प निहित है।
इस वर्ष ₹1,500 करोड़ के व्यापार का अनुमान
आंकड़ों और शोध रिपोर्टों के परिप्रेक्ष्य में देखें तो कांवड़ यात्रा का आर्थिक ढांचा तेजी से विस्तृत हुआ है। लखनऊ स्थित ‘गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज’ की 2024 की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, कांवड़ यात्रा उत्तर प्रदेश में औसतन 1,000 करोड़ रुपये (10 अरब से अधिक) का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष व्यापार उत्पन्न करती है। वर्ष 2017 के उपरांत राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था और सुविधाओं के विस्तार के चलते कांवड़ यात्रियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसके साथ ही होटल, ढाबा, परिवहन, टेंट, पूजा-सामग्री, वस्त्र और स्थानीय कुटीर उद्योगों का बाज़ार भी तेज़ी से आगे बढ़ा है।
भगवा टी-शर्ट, वाटरप्रूफ कवर और स्टील कलशों की मांग में उछाल
निरंतर वर्षा और उमस के कारण रेनकोट, बोतलबंद पानी, ग्लूकोज, फल और औषधियों की बिक्री में भारी वृद्धि दर्ज की जाती है। कांवड़ यात्रियों के मध्य ‘महादेव’ के स्लोगन वाली भगवा टी-शर्ट (₹80 से ₹500 तक), गमछे और वाटरप्रूफ मोबाइल कवर की भारी मांग रहती है। इसके अतिरिक्त, जलाभिषेक हेतु प्रयुक्त होने वाले अलंकृत स्टील कलशों का बाजार भी गुलजार रहता है।


