राजस्थान के चर्चित साध्वी प्रेम बाईसा संदिग्ध मौत मामले में सोमवार को एक बड़ा मोड़ आया है. घटना के करीब 20 दिन बाद जोधपुर की बोरानाडा थाना पुलिस (Sadhvi Prem Baisa Case) ने कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. SIT की तफ्तीश में लापरवाही के पुख्ता सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है. साध्वी की मौत के कारणों की परतें खोलने के लिए गठित SIT ने पिछले 20 दिनों में साध्वी के पिता, आश्रम स्टाफ और अस्पताल के कर्मचारियों से सघन पूछताछ की.
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Sadhvi Prem Baisa Case – पुलिस के अनुसार, कंपाउंडर देवी सिंह ने पूछताछ के दौरान बार-बार अपने बयान बदले, जिससे शक गहराता गया. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और एफएसएल (FSL) के नतीजों ने साफ कर दिया कि साध्वी को लगाए गए इंजेक्शनों और इलाज की प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई थी.
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देवी सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत केस दर्ज किया गया है. यह धारा पहले आईपीसी में 304A के रूप में जानी जाती थी, जो लापरवाही से मृत्यु कारित करने से संबंधित है. यदि कोई व्यक्ति बिना किसी आपराधिक इरादे के, केवल लापरवाही या उतावलेपन (जैसे गलत इंजेक्शन लगाना या बिना डॉक्टर के पर्चे के इलाज करना) से किसी की जान लेता है, तो यह अपराध इस श्रेणी में आता है. आरोप सिद्ध होने पर दोषी को 2 वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.


