अल फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली के साकेत कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) रिमांड में भेज दिया है. इससे पहले ईडी ने कल मंगलवार को लाल किला कार धमाके मामले से जुड़े यूनिवर्सिटी के ट्रस्टियों और प्रवर्तकों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कई जगहों पर रेड डालने के बाद ग्रुप के (Jawad Siddiqui on remand) अध्यक्ष जवाद अहमद को गिरफ्तार किया था. जवाद की गिरफ्तारी दिल्ली धमाके मामले की जगह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की गई है.
रिमांड नोट के जरिए बताया गया कि यूनिवर्सिटी ने गलत और फर्जी मान्यता (Fake Accreditation) दिखाकर बच्चों को लगातार दाखिला दे रही है और खूब पैसा कमा रही है. इसी तरह के झूठे दावों से यूनिवर्सिटी ने 415 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है. जांच में जब यूनिवर्सिटी के ITR की पड़ताल की गई तो वहां भी कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं.
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साल 2014-15 और 2015-16 में 30.89 करोड़ रुपये और 29.48 रुपये करोड़ को दान की रकम बताकर दिखाया गया है. इसी तरह 2016-17 के बाद से यूनिवर्सिटी ने अपनी बड़ी आय को शैक्षणिक कमाई बताना शुरू कर दिया. 2018-19 में यह आय 24.21 करोड़ रुपये थी. यही हाल 2024-25 का भी रहा. इस साल यह कमाई बढ़कर ₹80.01 करोड़ हो गई.
Jawad Siddiqui on remand – जांच एजेंसी ने 2 एफआईआर के आधार पर यह जांच शुरू की थी, जिसे दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने दर्ज की थी. ये दोनों एफआईआर 13 नवंबर को दर्ज कराई गई थी. इन एफआईआर में NACC Accreditation और यूजीसी से जुड़े झूठे दावे किए जाने का जिक्र है. दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के तहत धारा 318 (4), 336 (2), 336 (3), 336 (4), 338 और 340 (2) के तहत केस दर्ज किया.
