जशपुर। जशपुर जिले में वन एवं वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वनांचल विज्ञान केंद्र और सर्प ज्ञान केंद्र विकसित किए जाएंगे।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ अरुण पांडेय ने 15 और 16 सितंबर को जशपुर वनमंडल का विस्तृत दौरा किया। इस प्रवास के दौरान उन्होंने प्रस्तावित केंद्रों के निर्माण स्थलों तथा विभिन्न वन क्षेत्रों का भौतिक निरीक्षण किया और विभागीय अधिकारियों व मैदानी अमले के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
🔬 झरगांव में बनेगा छत्तीसगढ़ का महत्वाकांक्षी वन विज्ञान केंद्र: प्रशिक्षण और आजीविका का बनेगा मुख्य केंद्र
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के दो प्रमुख जिलों—जशपुर और जगदलपुर में उच्च स्तरीय वन विज्ञान केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।
इसी कड़ी में जशपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम झरगांव में ‘वनांचल विज्ञान केंद्र’ के निर्माण हेतु भूमि का चयन कर लिया गया है। 16 सितंबर को सीसीएफ अरुण पांडेय ने चयनित स्थल का दौरा कर उसकी भौगोलिक स्थिति, पहुंच मार्ग और विकास की संभावनाओं का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि केंद्र को जशपुर की समृद्ध जैव विविधता से जोड़कर विकसित किया जाए, जहां वन कर्मियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ आम जनता को वनों पर आधारित आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी।
🐍 ‘नागलोक’ तपकरा में अब बनेगा सर्प ज्ञान केंद्र: स्नेक पार्क के प्रस्ताव में तकनीकी बदलाव
सीसीएफ अरुण पांडेय ने जशपुर के प्रसिद्ध तपकरा वन परिक्षेत्र का भी दौरा किया और विभागीय कार्यों की समीक्षा की।
तपकरा क्षेत्र में पूर्व में ‘स्नेक पार्क’ का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के मानकों और तकनीकी कठिनाइयों के कारण अब इसके स्वरूप में बदलाव किया गया है। अब तपकरा में विशाल ‘सर्प ज्ञान केंद्र’ (Snake Knowledge Center) विकसित किया जाएगा, जो पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।
💡 वास्तविक सांप नहीं, मॉडल के जरिए दूर होगा अंधविश्वास: सर्पदंश की घटनाओं पर लगेगी लगाम
तपकरा के इस सर्प ज्ञान केंद्र में वास्तविक जीवित सांपों को कैद में नहीं रखा जाएगा, बल्कि अत्याधुनिक मॉडल और प्रतिरूपों के माध्यम से सांपों की विभिन्न प्रजातियों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी।
केंद्र का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश और सांपों को लेकर फैले अंधविश्वास, भ्रांतियों व डर को दूर करना है। इसके माध्यम से लोगों को सर्पदंश के सही प्राथमिक उपचार की वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी और पर्यावरण संतुलन में सांपों की महत्वपूर्ण भूमिका को समझाकर उनके संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।
🌲 पण्ड्रापाठ में वन अमले की समीक्षा बैठक: वनाग्नि नियंत्रण और वन्यजीवों की सतत निगरानी के निर्देश
प्रवास के अंतिम चरण में सीसीएफ ने सन्ना वन परिक्षेत्र के अंतर्गत पण्ड्रापाठ का निरीक्षण कर क्षेत्रीय गतिविधियों का जायजा लिया।
उन्होंने मैदानी वनकर्मियों की बैठक लेकर वनाग्नि (जंगलों की आग) पर प्रभावी नियंत्रण, व्यापक पौधरोपण और वन्यजीवों की 24 घंटे सतत निगरानी के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे स्थानीय ग्रामीणों और वनांचल समुदायों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जंगलों तथा वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।


