जमशेदपुर। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी रविवार को जमशेदपुर प्रवास पर पहुंचे। जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सर्किट हाउस में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान उन्होंने JSSC CGL (कर्मचारी चयन आयोग) परीक्षा में हुई भारी अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग को प्रमुखता से दोहराया। इस दौरान उन्होंने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार की मंशा और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए।
🔍 राज्य एजेंसियों की जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल: “अदालत में गड़बड़ी मानकर भी CBI से क्यों कतरा रही सरकार?”
पत्रकारों को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने राज्य की जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता और सरकार के रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि JSSC-CGL मामले में राज्य सरकार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दाखिल हालिया हलफनामे में खुद पूरी परीक्षा प्रक्रिया को दूषित माना गया है। बाबूलाल मरांडी ने सवाल दागा कि जब राज्य सरकार अब अदालत के समक्ष परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी स्वीकार कर रही है, तो इस संपूर्ण मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच किसी केंद्रीय एजेंसी (CBI) को सौंपने से क्यों पीछे हट रही है? उन्होंने मुख्यमंत्री की जवाबदेही तय करते हुए पूछा कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर हुई धांधली की भनक प्रशासनिक निगरानी तंत्र को समय रहते क्यों नहीं लगी?
🛑 “अधिकारियों की भूमिका की हो निष्पक्ष जांच”: JSSC और CID के शीर्ष अधिकारियों को हटाने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने JSSC CGL परीक्षा संचालन और शुरुआती जांच प्रक्रिया से जुड़े वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच कराने की जोरदार मांग की।
उन्होंने मांग की कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सुधीर गुप्ता और प्रशांत कुमार को तुरंत JSSC से हटाया जाए तथा मनोज कौशिक को CID के ADG पद से मुक्त किया जाए। इसके अलावा उन्होंने अनुराग गुप्ता समेत उन सभी अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की मांग की, जो इस परीक्षा प्रक्रिया और पूर्व में हुई शुरुआती जांच से जुड़े रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर सभी जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।
📁 CID की SIT जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न: निष्पक्षता के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी बेहद जरूरी
उल्लेखनीय है कि JSSC-CGL मामले में वर्तमान में राज्य CID की विशेष जांच टीम (SIT) जांच कर रही है, जिसने सितंबर में JSSC कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों की पड़ताल की थी और 250 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की थी।
बाबूलाल मरांडी ने इस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पूर्व की राज्य स्तरीय जांच में परीक्षा से जुड़ी संगीन गड़बड़ियां सामने नहीं आ सकी थीं, तो अब नए तथ्यों की जांच फिर से राज्य के स्तर पर ही क्यों कराई जा रही है? उन्होंने जोर देकर कहा कि JSSC और JPSC जैसी संवैधानिक भर्ती संस्थाओं की साख बचाने और लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पूरी पारदर्शिता आवश्यक है। इसलिए CBI जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराकर सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।


