नई दिल्ली/कोलकाता : भारत और बांग्लादेश के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर राष्ट्रीय सुरक्षा को पूरी तरह से कड़ा और अभेद्य बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर से एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। पश्चिम बंगाल से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा के उन अत्यधिक संवेदनशील और खुले हिस्सों में (BSF started fencing work in open areas) सीमा सुरक्षा बल ने मजबूत बाड़ लगाने (Fencing) का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है, जो भौगोलिक कठिनाइयों के कारण सालों से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बने हुए थे।

गौरतलब है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल राज्य में हुए राजनीतिक बदलाव और नई भाजपा सरकार के गठन के बाद, पिछले कई वर्षों से फाइलों में लंबित पड़े भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के मामलों में अप्रत्याशित तेजी आई है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्परता दिखाई है और बीएसएफ को बाड़बंदी के लिए आवश्यक जमीन सौंपने की प्रशासनिक प्रक्रिया को गति दे दी है।

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 BSF started fencing work in open areas – बीएसएफ के एक शीर्ष अधिकारी ने मीडिया को इस संबंध में ब्रीफिंग देते हुए बताया, “बॉर्डर पर जमीन सौंपने की प्रक्रिया अब आपसी समन्वय के चलते बेहद सुचारू रूप से चल रही है। बहुत जल्द करीब 27 किलोमीटर लंबे एक बड़े और अत्यधिक संवेदनशील हिस्से समेत कई अन्य छोटे-बड़े पैच की जमीन भी आधिकारिक तौर पर बीएसएफ को सौंप दी जाएगी।

🚧 घुसपैठ, मवेशी तस्करी और नकली नोटों के सिंडिकेट पर होगा सीधा प्रहार

रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 2,216 किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 569 किलोमीटर के हिस्से पर विभिन्न जटिल कारणों से अब तक पक्की बाड़बंदी नहीं हो पाई थी। इस भौगोलिक खुलेपन या क्षेत्र के कारण सीमा पार से अवैध घुसपैठ, मवेशियों की तस्करी, जाली भारतीय मुद्रा (FICN) और खतरनाक ड्रग्स की तस्करी जैसी राष्ट्रविरोधी घटनाएं लगातार होती रहती हैं। यही खुला बॉर्डर एरिया हमेशा से बीएसएफ और देश की अन्य खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक मुख्य सुरक्षा चुनौती बना हुआ है।

 

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