विदिशा (मध्य प्रदेश): मानसून की बारिश प्रारंभ होते ही मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलती हुई तस्वीरें सामने आने लगती हैं। विदिशा जिला मुख्यालय के निकट स्थित बंधेरा, ककरुआ, इमलिया और बेहलोट गांवों से एक ऐसी ही चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां के लगभग 10 स्कूली बच्चे रोजाना केवल 5 किलोमीटर के लंबे रास्ते और अतिरिक्त समय से बचने के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती बेतवा नदी पर बने जर्जर स्टॉप डैम को पार कर स्कूल जा रहे हैं।
⚠️ उफनती नदी पर बने स्टॉप डैम के 4 फीट के खतरनाक गैप को कूदकर पार करते हैं छात्र
विभागीय जानकारी के अनुसार, पक्का और सुरक्षित मुख्य मार्ग उपलब्ध होने और शासन द्वारा साइकिल मिलने के बावजूद बच्चे समय बचाने की जल्दबाजी में खतरनाक शॉर्टकट अपना रहे हैं।
यह रास्ता इतना जोखिम भरा है कि छात्रों को उफनती बेतवा नदी के बीच बने स्टॉप डैम के टूटे हुए 4 फीट चौड़े गैप को छलांग लगाकर पार करना पड़ता है। बारिश के मौसम में जरा सी चूक या पैर फिसलने पर बड़ा हादसा हो सकता है।
🚷 प्रशासन ने स्टॉप डैम पर कटीली झाड़ियां और तार लगाकर बंद की आवाजाही, ग्रामीणों ने की पक्के पुल की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए विदिशा के एसडीएम (SDM) क्षितिज शर्मा ने त्वरित प्रशासनिक संज्ञान लिया है।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने स्टॉप डैम के उस खतरनाक रास्ते पर कटीली झाड़ियां और तारबंदी कराकर आवाजाही को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया है। इस पर स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि या तो स्टॉप डैम पर अविलंब पक्का पुल निर्मित कराया जाए या फिर बंधेरा स्थित प्राथमिक स्कूल का उन्नयन (अपग्रेड) कर उसे हाई स्कूल बनाया जाए ताकि बच्चों को नदी पार न करना पड़े।
🗣️ “पिछले 5-6 वर्षों से बारिश के 4 महीनों में प्रभावित हो रही पढ़ाई”, पीड़ित छात्र ने बताई आपबीती
शासकीय हाई स्कूल पलोह के एक स्थानीय छात्र ने बताया कि “मैं और मेरे साथी पिछले 5-6 वर्षों से इसी तरह जोखिम उठाकर नदी के रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर हैं। हर साल बारिश के 4 महीनों में नदी उफान पर रहने और डैम का हिस्सा टूटा होने के कारण हमारी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित होती है।”
छात्रों का कहना है कि यदि बारिश के इन महीनों में नियमित स्कूल जाने की सुरक्षित व्यवस्था हो जाए, तो उनके परीक्षा परिणाम और बेहतर आ सकते हैं।
🚓 “सुरक्षा के लिए पटवारी और होमगार्ड जवान तैनात, पक्का मार्ग पहले से उपलब्ध”: एसडीएम क्षितिज शर्मा
प्रशासनिक पक्ष रखते हुए विदिशा एसडीएम क्षितिज शर्मा ने बताया कि संबंधित स्कूल में करीब 70 छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें से अधिकांश विद्यार्थी प्रतिदिन नियमित और सुरक्षित मार्ग से साइकिल द्वारा स्कूल पहुंचते हैं।
केवल 10 के करीब बच्चे ही स्टॉप डैम वाले खतरनाक शॉर्टकट का प्रयोग कर रहे थे। एसडीएम ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु मौके पर पटवारी और होमगार्ड के जवानों की तैनाती कर दी गई है तथा डैम पर स्लैब डालने की योजना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से अभिभावकों को यह विकल्प भी दिया गया है कि यदि वे अपने बच्चों का प्रवेश जिला मुख्यालय विदिशा के स्कूलों में कराना चाहते हैं, तो प्रशासन उनका एडमिशन कराने में पूर्ण सहयोग करेगा।


