स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान एसआईआर की वैधता और पारदर्शिता पर कई सवाल उठे. इस मामले में अगली सुनवाई अब 4 दिसंबर को होगी. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट (heated debate on SIR) अभिषेक मनु सिंघवी ने चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाला बागची के सामने अपनी दलीलें पेश कीं.
सिंघवी ने चुनाव आयोग की शक्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ECI को नियम बनाने का कोई अधिकार ही नहीं है. उसका काम नागरिकता टेस्ट करना नहीं है और यह प्रक्रिया आरपी एक्ट (RoPA) के दायरे से बाहर है. सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग का पावर संविधान लेवल तक सीमित है, न कि पूरे राज्य या देश स्तर पर. EC ने नागरिकता की जांच करने का अधिकार खुद पर थोप लिया है.
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सिंघवी ने कहा कि वास्तव में कानून यह है कि जब तक मैंने विदेशी नागरिकता प्राप्त नहीं कर ली है, मुझे भारतीय नागरिक माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी नागरिक को बिना सूचना दिए ‘गेस्ट लिस्ट’ में डाल दिया जाता है. माइग्रेशन को लेकर सिंघवी ने कहा कि माइग्रेशन एक ह्यूमन कैरेक्टरिस्टिक कैरेक्टरिस्ट है. इसे SIR के लिए जेनेरिक ग्राउंड पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
heated debate on SIR – प्रशांत भूषण ने SIR प्रक्रिया को अपारदर्शी बताते हुए दलील दी, लेकिन सीजेआई ने उन्हें व्यापक टिप्पणियों से रोक दिया. प्रशांत भूषण ने कहा कि एसआईआर इतनी जल्दी और इतने बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है कि फील्ड लेवल पर भारी दबाव बन गया है. उन्होंने कहा कि कई BLOs आत्महत्या कर रहे हैं. इसमें कोई पारदर्शिता नहीं हैं. इस पर CJI ने कहा कि कृपया आप अपनी बात तक ही सीमित रहें.
