
गाय को गुड खिलाते सीएम योगी।
– फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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जीवनदायिनी इसलिए कि इस टीके के कारण गोशाला में गायों में लंपी के केस थम गए। इस काम का असर ऐसा हुआ कि सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग ने गायों को स्वदेशी वैक्सीन को लगाने का शासनादेश जारी कर दिया है। इतना ही नहीं बल्कि 15 हजार डोज हिसार के राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र से पशुपालन विभाग के अधिकारी ले जा चुके हैं और एक लाख डोज की और मांग की है, जिन्हें बनाया जा रहा है।
दरअसल गोरखपुर के गोरखधाम मंदिर में सीएम योगी की गोशाला है। जहां पर कई गाय लंपी स्किन डिसीज से काफी खराब स्थिति में थी। रोजाना लंपी के दो तीन मामले गोशाला में मिल रहे थे। ऐसा तब था जब गायों को गोट पॉक्स की वैक्सीन लग चुकी थी।
ऐसे में उत्तर प्रदेश शासन को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली के तहत इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरई) और हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीइ) के वैज्ञानिकों की ओर से बनाई स्वदेशी वैक्सीन के बारे में पता लगा तो उन्होंने वैज्ञानिकों से संपर्क किया। इसके बाद हिसार के एनआरसीई से वैज्ञानिकों की एक टीम उत्तर प्रदेश गई और करीब 450 गायों को स्वदेशी वैक्सीन का टीका लगाया।
10 दिनों में गायों में बढ़ी वायरस से लड़ने की क्षमता
एनआरसीई के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. नवीन कुमार और उनके साथ अन्यों ने गाय की स्थिति जांची। यह बीमारी आगे न बढ़े इसलिए उन्होंने गायों को स्वदेशी वैक्सीन (लंपी प्रो वैक) का टीका लगाया। इसके बाद 10 दिनों में गायों में लंपी वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर चुकी थी। इसके बाद गोशाला में लंपी को कोई केस नहीं आया। इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने हरियाणा के वैज्ञानिकों की तारीफ भी की और देश भी में इसके प्रसार के लिए उच्च स्तर पर बात करने का अश्वासन भी दिया। ऐसा इसलिए क्यों यह स्वदेशी वैक्सीन अभी तक कागजी प्रक्रिया से बाहर ही नहीं आ सकी है। जबकि इसके परिणाम काफी प्रभावशाली रहे हैं।
विशेष अभियान चलाने के निर्देश
इसको लेकर उत्तर प्रदेश में अपर मुख्य सचिव रजनीश दुबे ने 31 अगस्त को सभी मंडलायुक्त, सभी जिलाधिकारी, निदेशक पशुपालन विभाग, निदेशक रोग नियंत्रण और प्रक्षेत्र पशुपालन विभाग को इस बाबत आदेश दिए। कि वह 5 सितंबर से लेकर 12 सितंबर तक लंपी रोग के नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाएंगे। इसके साथ ही लंपी को लेकर युद्ध स्तर पर कार्य करने को कहा गया है। इसके साथ ही हिसार के एनआरसीई से तत्काल स्वदेशी लंपी प्रो वैक वैक्सीन को प्राप्त कर पशुओं का टीकाकरण करने के निर्देश दिए हैं। वहीं लंपी वायरस से उपचार के दौरान की पूरी प्रक्रिया भी वैज्ञानिकों ने साझा की ताकि बीमारी आगे न बढ़े।
यह है लंपी स्किन डिसीज
लंपी स्किन डिसीज गाय और भैंसों में होती है। यह एक अधिसूचित बीमारी है। इसमें पशुओं के शरीर पर फोड़े हो जाते हैं। इसका वायरस इंसानों में चिकिनपॉक्स वायरस के जैसा होता है। इसे कैप्रीपॉक्स कहा जाता है। इसमें पशु की मृत्यु तक हो चुकी है। पिछली लहर में हजाराें पशुओं ने इस बीमार से अपनी जान गंवाई थी।

