एसिड रिफ्लक्स यानी एसिडिटी के बोझ को आम मानकर ज्यादातर लोग झेलते रहते हैं. कभी सोडा ड्रिंक तो कभी गैस्ट्रिक रिलीफ वाली गोली ले लेने से कुछ देर के लिए राहत मिल जाती है. लेकिन ये प्रॉब्लम एक बार किसी के शरीर में बस जाए तो इसे खत्म करना आसान नहीं है. ड्रिंक्स, घरेलू नुस्खे या दवा से इसका इलाज करने के बजाय (Gut Health) असली परेशानी से छुटकारा पाना चाहिए. यहां हम आंतों में जमने वाली गंदगी या बिगड़ी हुई गट हेल्थ की बात कर रहे हैं.

हमारे शरीर में गुड और बैड, दोनों तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं. आंतों की बात करें तो इसमें करीब 100 ट्रिलियन से ज्यादा बैक्टीरिया है और इनके ग्रुप को माइक्रोबायोम पुकारा जाता है. अगर इंटेस्टाइन में इनका बैलेंस बिगड़ जाए तो इस प्रॉब्लम को डिस्बायोसिस (Dysbiosis) कहते हैं. ऐसे में गट हेल्थ बिगड़ने लगती है और इसका अहम कारण हमारा खानपान है.

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सीनियर डाइटिशियन गीतिका चोपड़ा कहती हैं कि अगर किसी को कब्ज की प्रॉब्लम है तो ये आंतों में गंदगी के जमने का संकेत है. कब्ज से ब्लोटिंग, एसिडिटी या दूसरी एसिड रिफ्लक्स से जुड़ी प्रॉब्लम्स होंगी. आंतों में दिक्कत को गट इंफ्लामेशन भी पुकारा जाता है.

Gut Health – एक्सपर्ट ने आगे कहा, जब आप शरीर को क्लीन करने का वक्त देते हैं तो आंतें क्लियर हो पाती हैं या टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं. इसलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं तो आंतों की सफाई हो पाती है. इसका फायदा दूसरे अंगों को मिलता है क्योंकि ऐसा करने से ये अंग ठीक से काम कर पाते हैं.़

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