उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक ऐसी खौफनाक स्वास्थ्य त्रासदी सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. जिले के लगभग एक दर्जन गांवों में बच्चे एक ‘अनोखी और रहस्यमयी’ बीमारी (mysterious disease) की चपेट में हैं. आलम यह है कि जो बच्चे जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, वे चंद महीनों बाद एक तेज बुखार की चपेट में आते हैं और ताउम्र के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से दिव्यांग हो जाते हैं.
गाजीपुर के फतेहुल्लापुर, बहादीपुर, हरिहरपुर, हाला, और छोटी जंगीपुर समेत करीब 12 गांवों में यह मंजर आम हो चला है. इन गांवों की दास्तां एक जैसी है. बच्चा पैदा तो ठीक हुआ, लेकिन 4 से 6 महीने बीतते ही अचानक तेज बुखार आया और फिर शरीर ने साथ देना छोड़ दिया. कई परिवारों में तो दो-दो बच्चे इस बीमारी का शिकार हैं.
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उदाहरण के तौर पर, हरिहरपुर गांव की दो बेटियां जन्म के समय स्वस्थ थीं, लेकिन महज कुछ महीनों के अंतराल पर उन्हें बुखार आया और अब वे मानसिक रूप से पूरी तरह अक्षम हैं. उनके पिता गुजरात में मजदूरी करते हैं और घर इसलिए नहीं आते ताकि यात्रा के पैसे बचाकर बेटियों के इलाज में लगा सकें. डॉक्टरभी यह नहीं बता पा रहे कि आखिर यह कौन सा वायरस है जिसने बच्चों को इस हाल में पहुंचा दिया है.
mysterious disease – बीमारी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में माता-पिता अपने बच्चों को रस्सियों या लोहे की जंजीरों से बांधकर रखने को मजबूर हैं. परिजन बताते हैं कि मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण बच्चे भाग जाते हैं या खुद को और दूसरों को चोट पहुंचा सकते हैं. उनकी नित्य क्रियाओं से लेकर भोजन तक की जिम्मेदारी अब बूढ़े माता-पिता के कंधों पर है.


