अयोध्या : प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी प्रकरण में जांच प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। गृह विभाग द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को सौंप दी है।  पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के दो बेहद करीबी सहयोगियों को मंदिर की व्यवस्था से (final report of sit submitted) तत्काल प्रभाव से हटाते हुए उनके मंदिर परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

 केडी तिवारी उर्फ ‘बड़े बाबू’ और बजरंग पाठक पर गिरी गाज 

ट्रस्ट द्वारा हटाए गए दोनों कर्मचारी मंदिर के बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाल रहे थे:

    • केडी तिवारी (बड़े बाबू): ये रामलला के बहुमूल्य आभूषणों और श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित सोने-चांदी व अन्य कीमती वस्तुओं के आधिकारिक लेखा-जोखा और भंडार की जिम्मेदारी देख रहे थे।

    • बजरंग पाठक: ये वीआईपी दर्शनार्थियों के लिए विशेष प्रसाद, अंगवस्त्र और अन्य भेंट व्यवस्था का प्रबंधन संभालते थे।

 आरोपों को बताया सोची-समझी साजिश

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को मिलने के बाद अयोध्या के संतों और पूर्व पदाधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है:

    • संतों से मेल-मुलाकात: ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा लगातार साधु-संतों से भेंट कर रहे हैं।

    • साजिश का दावा: पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा विभिन्न अखाड़ों और संतों के साथ बैठकें कर स्वयं और चंपत राय पर लगे सभी आरोपों को दुर्भावनापूर्ण साजिश बता रहे हैं।

 अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत के स्तर पर भी निगरानी रखी जा रही है:

    • सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र रूप से जांच कर रहा है, जो अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में सीलबंद लिफाफे में दाखिल करेगी।

    • 8 गिरफ्तारियां: जून के पहले सप्ताह में उजागर हुए इस सनसनीखेज चंदा चोरी (final report of sit submitted) मामले में पुलिस अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

       

 

Share.
Exit mobile version