FDI – नई दिल्ली: कोरोना काल में भारत में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ा है और इसमें आगे भी व्यापक संभावनाएं हैं। विशेषतौर पर अगर यहां विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स की दरें आकर्षक बनाई जाएं तो कई विदेशी कंपनियां सालाना 10 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश कर सकती हैं। FDI और अन्य उद्योग चैंबर्स ने विदेशियों पर लगाए जाने वाले कर की व्यवस्था में बदलाव के लिए दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है।

इनका कहना है कि हाल के दिनों में केंद्र सरकार ने जिस तरह से विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कदम उठाए हैं, अगर अब उनके जुड़ी कर व्यवस्था में भी बदलाव हो, तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) में काफी वृद्धि हो सकती है।

फॉरेन इंवेस्टर्स फोरम के ग्लोबल चेयरमैन डॉ. बीके मोदी का कहना है कि चार दशक पहले प्रति व्यक्ति आय के मामले में चीन की इकोनॉमी का आकार भारत से छोटा था। उसके बाद चीन में विदेशी निवेश नियमों को ज्यादा आकर्षक बनाने का सिलसिला शुरू हुआ और चीन की इकोनॉमी आगे बढ़ती गई। चीन ने अपने यहां काम करने वाले विदेशी नागरिकों की आय पर ज्यादा राहत देने की नीति अपनाई।

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1980 के बाद से चीन में अभी तक 273 लाख करोड़ रुपये का FDI आ चुका है, जबकि भारत में सिर्फ 44 लाख करोड़ रुपये का FDI ही आया है। अगर भारत सरकार विदेशी निवेशकों को ज्यादा कर राहत देने की नीति अख्तियार कर ले तो हर वर्ष यहां भी 10 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त विदेशी निवेश आ सकता है। इस फार्मूले से भारत चीन की इकोनॉमी को भी पीछे छोड़ सकता है।

भारत को यहां काम करने वाले विदेशियों पर लगाए जाने वाले डायरेक्ट टैक्स प्रविधानों में बदलाव करने में अब देरी नहीं करनी चाहिए। मौजूदा नियम के मुताबिक अगर कोई विदेशी भारत में 182 दिनों से ज्यादा रहता है, तो उसकी वैश्विक आय पर कर लगाने का प्रविधान है। वैसे विदेशी नागरिक के मूल देश और भारत के बीच दोहरे कराधान संबंधी समझौता है तो वह भारत में कर देने से बच सकता है, लेकिन इससे मौजूदा कानून के तहत कुछ दूसरी किस्म की समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

मसलन, उन्हें अपने देश में ज्यादा कर देना पड़ता है और टैक्स क्रेडिट बेनिफिट लेने के पचड़े में पड़ना होता है। कई बार टैक्स देयता संबंधी गणना में गड़बड़ी होने पर उन्हें दोनों देशों के कर कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस तरह से विदेशी निवेशकों को भारत में रहकर अपने निवेश को बेहतर तरीके से प्रबंधन करने के लिए खास प्रोत्साहन नहीं मिलता है।

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