गिरिडीहः एक तरफ ईडी के जलापूर्ति घोटाले की जांच से (fake bank guarantee) झारखंड में बवाल मचा हुआ है तो दूसरी और फर्जी बैंक गारंटी से योजना का टेंडर लेने वाले पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है. हम बात कर रहे हैं जिले के एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजना के संदर्भ में. जिसमें जल जीवन मिशन के तहत हर एक ग्रामीण घर, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र में नल के माध्यम से जल पहुंचाया जाना है.
दरअसल जिले के विभिन्न पंचायतों में एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर होती रही है. इसी गड़बड़ी के बीच इस बार दिसंबर माह में ही विभाग की तरफ से नगर थाना में कार्यपालक अभियंता राहुल श्रीवास्तव ने लिखित आवेदन देकर बुद्धा कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रॉपराइट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी.
प्राथमिकी में दर्ज बातों का जिक्र करें तो यह साफ हुआ कि ठेकेदार ने विभाग के कुछ कर्मियों और अधिकारियों की मिलीभगत से अलग ही खेल कर दिया. जिले के विभिन्न प्रखंड में एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजना (पेयजलापूर्ति योजना) का काम उक्त संवेदक को मिला था वह भी 1 करोड़ 30 लाख के फर्जी बैंक ड्राफ्ट की बदौलत. इतना ही नहीं टेंडर लेने के बाद थोड़ा बहुत काम किया गया और फिर संवेदक के द्वारा मोटी रकम की निकासी भी कर ली गई.
fake bank guarantee – यहां बता दें कि किसी भी टेंडर को लेने से पहले संवेदक के द्वारा बैंक गारंटी दी जाती है. इसमें बैंक की एफडी/किसान विकास पत्र / टीडीपी जैसे प्रमाण पत्र होते हैं. बैंक के द्वारा जारी यह वित्तीय दस्तावेज यह प्रमाणित करता है कि बोली लगाने वाला, टेंडर की शर्तों और अनुबंध को पूरा करेगा. यही बैंक सिक्योरिटी विभाग को वित्तीय सुरक्षा उस वक्त प्रदान करता है जब संवेदक काम पूरा किए बगैर भाग जाता है.


