World Hypertension Day के अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए Dr. (Prof.) Tarun Kumar, Medanta – The Medicity के मेडांटा हार्ट सेंटर के कार्डियोलॉजिस्ट, ने कहा कि भारत में लगभग 22 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से पीड़ित हैं, लेकिन इनमें से केवल 10 से 12 प्रतिशत लोगों का ही रक्तचाप नियंत्रित है।
उन्होंने कहा कि हाइपरटेंशन एक “साइलेंट किलर” है और यह हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर तथा अन्य गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण बन रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 50 प्रतिशत से अधिक लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनका रक्तचाप बढ़ा हुआ है।
डॉ. कुमार ने बताया कि जिन लोगों का निदान हो जाता है और दवाएं शुरू कर दी जाती हैं, उनमें से लगभग आधे मरीज बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं। वहीं जो लोग उपचार जारी रखते हैं, उनमें से भी लगभग 50 प्रतिशत का रक्तचाप नियंत्रित नहीं हो पाता। यही वजह है कि कुल मरीजों में केवल 10 से 12 प्रतिशत लोग ही अपने ब्लड प्रेशर को निर्धारित स्तर पर बनाए रख पाते हैं।
उन्होंने बताया कि सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg से कम होना चाहिए। यदि रक्तचाप 130/80 mmHg या उससे अधिक हो, तो इसे उच्च रक्तचाप माना जाता है और इसके लिए चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक होता है।
डॉ. कुमार ने कहा कि दवाओं के साथ-साथ संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर उच्च रक्तचाप को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने DASH (Dietary Approaches to Stop Hypertension) डाइट अपनाने की सलाह दी, जिसमें भरपूर मात्रा में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद, मछली, दालें, बीन्स, मेवे और बीज शामिल होते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतिदिन नमक (सोडियम) का सेवन 2,300 मिलीग्राम से कम रखा जाना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए इसे 1,500 मिलीग्राम तक सीमित किया जा सकता है। साथ ही तले-भुने खाद्य पदार्थों, संतृप्त वसा और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
डॉ. कुमार ने कहा कि नियमित रूप से रक्तचाप की जांच, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन और स्वस्थ खानपान अपनाकर भारत में उच्च रक्तचाप के बढ़ते बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


